चंद्र आर्य के पिता गोविंदय्या
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भारतीय सेना के सेकंड लेफ्टिनेंट से कनाडा तक का सफर
चंद्र आर्य के पिता गोविंदय्या ने कहा, मेरे पास अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। उन्होंने बताया कि चंद्र एक छोटे से गांव में पले-बढ़े थे, लेकिन अंत में कनाडा पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने कई करियर विकल्पों को आजमाया और अंत में नेपियन, कनाडा के सांसद बने। गोविंदय्या ने बताया कि चंद्र स्कूल में एक होनहार छात्र थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्हें भारतीय सेना में बतौर सेकंड लेफ्टिनेंट चुना गया। इसी दौरान उन्हें दिल्ली में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में जूनियर साइंटिस्ट की नौकरी भी मिली। हालांकि,डीआरडीओ का माहौल उन्हें पसंद नहीं आया और वे वहां से लौट आए। फिर उन्होंने कर्नाटक राज्य वित्त निगम (केएसएफसी) में डिप्टी मैनेजर के रूप में काम करना शुरू किया। अपने शुरुआती दिनों में चंद्र आर्य ने कई भूमिकाएं निभाईं।
कनाडा में स्वयंसेवी संगठनों संग किया काम निकाली पत्रिका
पिता गोविंदय्या के मुताबिक, केएसएफसी में काम करने के बाद चंद्र ने अपनी खुद की कंसल्टेंसी शुरू की और फिर ग्रेनाइट कटिंग और पॉलिशिंग का काम किया। इसके बाद उन्होंने ओमान और कतर में कुछ समय तक काम किया। आखिरकार, वे कनाडा चले गए और वहां एक वित्तीय कंपनी में काम करने लगे। गोविंदय्या ने बताया कि एक भारतीय मूल के व्यवसायी ने चंद्र को अपनी कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट बनने का बुलावा भेजा। बाद में कनाडा में रहते हुए, चंद्र ने 7-8 स्वयंसेवी संगठनों के साथ काम किया। इससे उन्हें कई लोगों से जुड़ने का मौका मिला। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ एक मासिक पत्रिका भी शुरू की। इसकी वजह से वे कई क्षेत्रों के प्रभावशाली लोगों के संपर्क में आए। इसके बाद, उन्होंने कनाडा की लिबरल पार्टी जॉइन की और नेपियन के सांसद का चुनाव जीता।