इस उम्र में हाथ कांपते हैं, आंखों से साफ दिखाई और कानों से सुनाई नहीं देता, चलने के लिए बैसाखी या किसी के कंधे का सहारा लेना होता है, लेकिन इस 93 साल के बूढ़े शख्स को देखिए, इस उम्र में भी हौसला, हिम्मत और ताकत किसी 16 साल के लड़के से कम नहीं। बूढ़ी हड्डियों में इतना दमखम की आसमान के सीने पर सवारी कर डाली।
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93 की उम्र में उड़ा ले गया सेना का लड़ाकू विमान, सब देखते रह गए
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93 साल जी चुके जनरल एमिल बोसेक की नस-नस बूढ़ी है, चेहरे पर झुर्रियां पड़ चुकी हैं, लेकिन इनका दिल जवां है, और दिल में एक आखिरी ख्वाहिश ऐसी कि सोचने पर ही जेहन में उथल-पुथल मच जाए। लेकिन कहते हैं न कि दिल से चाहो तो पूरी कायनात आपकी मदद करती है।
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डेलीमेल की खबर के मुताबिक बोसेक इस उम्र में ब्रिटेन की रायल एयरफोर्स का टू सीटर सुपरमैरीन स्पिटफायर विमान उड़ाना चाहते थे। आखिरकार शाही एयरफोर्स ने अपने पू्र्व हीरो की ख्वाहिश को हकीकत में बदलने का मौका दिया।
93 की उम्र में उड़ा ले गया सेना का लड़ाकू विमान, सब देखते रह गए
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बोसेक ने टू सीटर लड़ाकू विमान की कॉकपिट पर सवार हुए तो जोश और फुर्ती और उनके चेहरे की चमक किसी युवा योद्धा से कम नहीं थी। करीब 20 मिनट तक आसमान उनके विमान की आवाज से गूंजता रहा। इस उम्र में विमान उड़ाकर उन्होंने अनोखा कारनाम कर दिखाया। इस मौके पर बोसेक के परिवार वाले, करीबी और शाही एयरफोर्स के अधिकारी मौजूद रहे।
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बोसेक चेक युद्ध के हीरो हैं। साल 1940 में युवावस्था में बोसेक रायल एयरफोर्स में बतौर मैकेनिक भर्ती हुए थे। तीन साल बाद उन्हें ट्रेनिंग के लिए कनाडा भेजा गया और अक्टूबर 1944 से वे रॉयल एयरफोर्स में बतौर पायलट तैनात रहे। वे एयरफोर्स का 310 स्क्वॉड्रोन उड़ाते थे।
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साल 1946 में एयरफोर्स छोड़ने तक उन्होंने 26 दफा ऑपरेशन फ्लाइट्स को अंजाम दिया। वह अपने गृहनगर में अब भी जहाज उड़ाते हैं। टू सीटर विमान उड़ाने के बाद बोसेक ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि 70 साल बाद यह उड़ान अच्छी रही एकदम परफैक्ट!