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किसी ने बनाया ताजमहल तो किसी ने तोड़ा पहाड़, मोहब्बत की 7 दास्तानें

Mon, 18 Apr 2016 07:21 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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बुलंदशहर का ताजमहल! - फोटो : wonderslist.com
प्यार कभी हैसियत का मोहताज नहीं होता, लेकिन हो जाए तो हैसियत शहंशाह शाहजहां से भी कम नहीं होती। इसकी बानगी बुलंदशहर का मकबरा है जो एक नजर में शाहजहां के ताजमहल की तरह ही विम्ब बनाता है। इसे बनाने वाला 80 बसंत देख चुका है, बदन बूढ़ा हो गया है, लेकिन दिल आज भी जवां है। रिटायर्ड पोस्ट मास्टर फैजुल कादरी ने इसे अपनी मरहूम बेगम ताजामुल्ली की याद में खाली पड़ी जमीन पर बनवाया है। इसमें बेगम की कब्र है। मकबरे की ऊंचाई 27 फीट है। उम्र भर की कमाई लग चुकी है। अब तक 14 लाख रुपए इसकी चुनाई में खर्च हो चुके हैं। काम अब भी बाकी है। कई लोग और यूपी सरकार कादरी को आर्थिक मदद की पेशकश कर चुकी है। लेकिन कादरी कहते हैं कि खुद की कमाई से ही वो इस निशानी पूरा करेंगे। खास बात ये भी है कि कादरी ने भी बेगम की कब्र के बगल में अपनी कब्र एडवांस में खुदवा रखी है। कादरी का यही एकमात्र सपना है कि दुनिया से रुख्सत होने के बाद यहीं सुपुर्द-ए-खाक किया जाए।
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ताजमहल ही नहीं, ये भी हैं सच्चे प्यार की निशानियां

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प्यार की खातिर 22 साल खोदा पहाड़ - फोटो : wonderslist.com
सिल्वर स्क्रीन पर चस्पा होने के बाद अब शायद ही कोई 'माउंटेन मैन' दशरथ मांझी को नहीं जानता हो। पत्नी से प्यार की खातिर 22 साल तक हथौड़ा चलाया और पहाड़ खोदकर रास्ता बना दिया। बिहार के गया जिले के गहलूर गांव के दशरथ मांझी की पत्नी फागुनी देवी की साल 1959 में पहाड़ पर चढ़ते वक्त हादसे में जान चली गई तो मांझी ने पहाड़ से दुश्मनी कर ली। साल 1960 से 1982 तक मांझी ने दिन-रात एक कर दिया और पहाड़ को तोड़कर रास्ता बना दिया। इस दौरान स्थानीय लोग मांझी को पागल समझते रहे। लेकिन इस पागलपन के पीछे मांझी के बेपनाह मोहब्बत थी जिसके आगे पत्थर की चट्टाने ढहती गईं और 70 किलोमीटर का रास्त महज चंद किलोमीटर में तब्दील हो गया। 17 अगस्त 2007 को मांझी की गालब्लैडर के कैंसर से मौत हो गई। बिहार सरकार ने मांझी का शासकीय अंतिम संस्कार किया। अफसोस की बात ये रही कि जिंदा रहते मांझी ने दिल्ली तक कदमों से नाप दिया लेकिन तब सरकारें और स्थानीय नेता मदद के लिए उदासीन रहे।
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ताजमहल ही नहीं, ये भी हैं सच्चे प्यार की निशानियां

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द मिस्ट्री कैस्टल - फोटो : wonderslist.com
नन्हें हाथ समंदर के किनारे रेत का किला बनाते, पानी की लहर आती और किला ढह जाता। किला ढहने पर नन्हीं आंखों में समंदर की मानिंद खारे पानी की बूंदे झलक आतीं। लेकिन वो आंसू करोड़ों-अरबों के खजाने से भी महंगे थे। इस बात का अहसास तब हुआ जब पिता के गुजरने के बाद उसे मिली वसीयत का पता चला। आज अमेरिका के एरीजोना स्थित जिस घर की इमारत को दुनिया द मिस्ट्री कैस्टल यानी रहस्यमई किला कहती है, उसे लूथर वॉयसे गुली ने अपनी बेटी मैरी लोउ गुली के लिए बनाया था। साल 1945 में जब वकील ने मैरी को वसीयत पढ़कर सुनाई तो बेटी और उसकी मां हैरान रह गईं। 8 एकड़ जमीन से घिरे किले को उसके पिता ने खुद 15 साल की कड़ी मेहनत से बनाया था। दोनों मां-बेटी जब इसमें रहने गईं तो किले की खुफिया जगहों में बेशुमार दौलत और चिट्ठियां मिलीं। 26 जनवरी साल 1948 में पहली दफा लाइफ मैगजीन में इस किले की कहानी छपी। नवंबर 2010 में मैरी की मौत के बाद से ये जगह दुनिया भर के पर्यटकों के लिए खुली है। ये किला बाप-बेटी के स्नेह की अदभुत निशानी है।

ताजमहल ही नहीं, ये भी हैं सच्चे प्यार की निशानियां

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कोरल कैस्टल - फोटो : wonderslist.com
फ्लोरिडा का कोरल कैस्टल इसकी कारीगरी के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इसे देखकर कोई कह नहीं सकता है कि ये एक आदमी का बनाया हुआ कैस्टल है। लेकिन ये सच है। लातवियाई शख्स एडवर्ड लीडस्केलनिन ने 28 वर्षों की मशक्त के बाद इसे अपनी पत्नी की याद में बनाया। कैस्टल 1100 टन के पत्थरों से बना है। 8 एकड़ में पत्थरों को इतनी खूबसूरती से सेट किया गया है कि बिना सीमेंट के भी ये अपनी जगह जमे हुए हैं। पूरी तरह से 1951 में ये कैस्टल तैयार हो सका। आज इसकी तुलना गीजा के पिरामिड से भी की जाती है।
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दिल नुमा चारागाह - फोटो : wonderslist.com
साल 2012 में 42 वर्षीय बलूनिस्ट एंडी कॉलेट ने की नजर जब जमीन पर पड़ी तो उस राज से पर्दा उठ गया जो एक आशिक ने अपने अपनी दिलरुबा के लिए तैयार किया था। कई एकड़ जमीन पर एक दिल नुमा चारागाह प्रेमिका की याद में बना रखा था। इंग्लैंड के साउथ ग्लोसेस्टरशायर में इसे देखा जा सकता है। विंस्टन होव्स नाम के किसान ने इसे अपनी पत्नी जैनेट की याद में बनाया। 6 एकड़ में करीब 6 हजार ओक वृक्ष लगाए, उन्हें दिल के आकार में पिरोया और आज ये दिलनुमा मीडो दुनिया भर के लिए अजूबा बना हुआ है।
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गिटार के आकार का बगीचा - फोटो : wonderslist.com
पेडरो मार्टिन उरेटा उस किसान का नाम है जिसने अपनी बीवी ग्रेसिएला राइजोज की याद में कई एकड़ में गिटार के आकार का सुंदर बगीचा बना डाला। उरेटा की बीवी को गिटार बहुत पसंद था। उरेटा ने 35 वर्षों तक तमाम पेड़-पौधे लगाए। उन्हें गिटार के आकार में लगाया। आज इस गिटार को नासा के सैटेलाइट और हवाईजहाज से देखा जा सकता है। लेकिन 70 वर्षीय उरेटा हवाई सफर करने में सहज महसूस नहीं करता है। उसने तस्वीरों के जरिए इसे देखा है।
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40 वर्षों में 10 हजार प्रेम पत्र लिख डाले - फोटो : wonderslist.com
आप अपनी प्रेमिका को कितने खत लिख सकते हैं? खैर ये सुनने में अजीब लग सकता है क्योंकि आज जमाना ईमेल और सोशल मीडिया का है। लेकिन एक आशिक ऐसा भी है जिसने अपने प्यार के लिए 10 हजार प्रेम पत्र लिखे। न्यू जर्सी के एक 70 साल के बुजुर्ग ने अपनी पत्नी क्रिस्टेन के लिए 40 वर्षों में 10 हजार प्रेम पत्र लिख डाले। इन पत्रों को उसने उस दिन से लिखना शुरू किया जब दोनों पहली दफा डेटिंग पर मिले थे। साल के 365 दिन उसने ये पत्र लिखना नहीं छोड़ा। इतने पत्रों को रखने के लिए 25 बक्सों की जरूरत पड़ी।

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