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Covid-19: अब कुत्ते लगा लेंगे आपके शरीर में मौजूद कोरोना वायरस का पता, ट्रेनिंग देने का काम शुरू

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Coronavirus - फोटो : अमर उजाला
कोरोना वायरस का संक्रमण चीन के बाहर अब कई देशों में फैल चुका है। भारत में इससे संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कोरोना वायरस का कहर सबसे ज्यादा इटली में देखने को मिला है। जहां अब तक नौ हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 80 हजार से अधिक लोग संक्रमित हैं। वैज्ञानिक इसके इलाज की खोज में लगे हुए हैं। इस बीच लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन ने संक्रमित मरीजों की पहचान करने के लिए कुत्तों की मदद लेने का फैसला किया है।

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dogs training - फोटो : अमर उजाला

जीहां आपने बिल्कुल सही सुना। अब इस महामारी से निपटने के लिए कुत्तों की मदद लेने का फैसला किया गया है। ये बात तो आप सभी जानते ही होंगे कि कुत्तों में सूंघने की क्षमता मनुष्यों से 10 गुना ज़्यादा होती है ऐसे में वैज्ञानिकों का दावा है कि कुत्ते किसी भी बीमारी का सूंघकर भी बड़ी आसानी से पता लगा सकते हैं। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन (LSHTM) ने ब्रिटेन की एक अंग्रेजी वेबसाइट के माध्यम से बताया कि कुत्ते मलेरिया जैसे रोग का पता सूंघकर लगा लेते हैं। इसलिए कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस जैसी महामारी से निपटने के लिए इनकी मदद ली जाएगी। इसके लिए कुत्तों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

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कुत्ते - फोटो : ट्विटर
LSHTM के शोधकर्ताओं का दावा है कि इसकी संभावना कहीं ज्यादा है कि कुत्ते कोरोना वायरस का को सूंघकर पता लगा पाएंगे। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन और ब्रिटेन की एक संस्था मेडिकल डिटेक्शन डॉग्स ने साथ मिलकर कोरोना वायरस के संक्रमण का पता कुत्तों से लगवाने की पहल की है। मेडिकल डिटेक्शन डॉग्स के चीफ एग्जिक्यूटिव और फाउंडर क्लैर गेस्ट का मानना है कि कोरोना वायरस को सूंघकर पहचानने में जरा भी नहीं चूकेंगे। यदि यह सिद्ध हो जाता है, तो कुत्तों का उपयोग परीक्षण के लिए किया जा सकता है।

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कुत्ते - फोटो : ट्विटर

कुत्तों में इस वजह से सूंघने की क्षमता तेज होती है

कुत्तों में सूंघने की क्षमता इंसानों से 10 गुना ज्यादा होती है। जो कि इनके जेकबसन या वोमेरोनेजल अंग के कारण होती है। यह इनके नथुनों और मुंह के ऊपरी हिस्से पर होता है। वैज्ञानिकों को अभी तक पता नहीं चल पाया है कि इनमें यह अंग क्यों होता है। मगर बिल्लियों और अन्य जानवरों पर किए गए अध्ययन बताते हैं कि शायद यह क्षमता उनके पास इसलिए है ताकि वे अन्य कुत्तों द्वारा छोड़े गए संकतों को पहचान सकें। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि हम इंसान 10 खरब अलग-अलग गंधों की पहचान कर सकते हैं लेकिन कुत्ते इंसानों से कहीं आगे हैं। कुत्ते की नाक में गंध पहचानने वाले 22 करोड़ रिसेप्टर होते हैं।
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dogs

ये पहली बार नहीं है जब किसी बीमारी का पता लगाने के लिए कुत्ते का सहारा लिया जा रहा हो। इससे पहले यूनिवर्सिटी ऑफ आर्कांसस फॉर मेडिकल साइंसेज (यूएएमएस) ने अपने एक प्रयोग में दिखाया था कि प्रशिक्षित कुत्ते थॉयरॉयड से पीड़ित इंसान और स्वस्थ इंसान के मूत्र की गंध के आधार पर फर्क कर सकते हैं। बीगल्स नस्ल के कुत्तों में सूंघने की जबरदस्त क्षमता होती है जिसकी वजह से इन्हें एयरपोर्ट पर स्निफ डॉग का काम सौंपा जाता है। ये बहुत फ्रेंडली होते हैं और दूसरों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। हो सकता है कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए इसी ब्रीड के कुत्तों को ट्रेनिंग दी जाए। कोरोना वायरस के मामले में की गई ये पहल अगर कारगर साबित होती है तो यह परीक्षण के लिए अपनाया गया काफी तेज और प्रभावी तरीका होगा।

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