वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का छात्रसंघ चुनाव रविवार को संपन्न हो गया। दो साल बाद एबीवीपी ने अध्यक्ष पद पर अपना कब्जा जमाया। मतदान के दौरान कई रोचक नजारे सामने आए। परिसर के बाहर संगठनों के प्रत्याशी व कार्यकर्ता जोर-शोर से समर्थन मांगते नजर आए लेकिन अंदर का नजारा तो बिल्कुल ही जुदा था। चुनाव में वोट पाने और जीत हासिल करने के लिए प्रत्याशी हर तरह के हथकंडे अपनाते हैं। इसी तरह का नजारा रविवार को काशी विद्यापीठ में जीवंत हआ। आगे की स्लाइड्स में देखें....
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- फोटो : अमर उजाला
हर प्रत्याशी जीत हासिल करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहा था। वोटरों को अपने पक्ष मे करने के लिए चुनाव लड़ रहे छात्र नेता लाव लश्कर वाले जुलूसों और शक्ति प्रदर्शन के अलावा चरण वंदना भी कर रहे थे। वोटर छात्र-छात्राओं को देखते ही प्रत्याशी उनके पैर पकड़कर वोट की भीख मांगते नजर आए। प्रत्याशियों ने वोटरों का पैर तब तक नहीं छोड़ा, जब तक वोटर ने उन्हें वोट देने की हामी नहीं भरी।
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जमीन पर चादर बिछाकर छात्रसंघ चुनाव के प्रत्याशी लेटे थे और आने जाने वाले छात्रों पर टकटकी लगाए थे। जैसे ही छात्र पास से गुजरते, उसकी चरण वंदना करने लगते। उसके पैर पकड़कर प्रत्याशी लिपट जाते, हाथ जोड़कर गुहार करते। मनुहार करते कि भइया वोट हमही के देइहा। यह नजारा रविवार को काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ चुनाव के मतदान के दौरान रहा।
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कई छात्र तो वोट मांगने के इस अनूठे अंदाज से वाकिफ थे लेकिन जो नये थे वो ये तरीका देखकर हैरान जरूर थे। इन सबके साथ ही पुलिस अधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक छात्रों के इस अंदाज से हैरत में रहे। छात्रसंघ चुनाव का जायजा लेने एसएसपी आनंद कुलकर्णी के साथ पहुंचे डीएम सुरेंद्र सिंह ने छात्रों के इस तरीके पर हैरानी के साथ ही नाराजगी जताई।
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उन्होंने प्रत्याशियों से पहले तो खड़े हो जाने को कहा। जब वो नहीं खड़े हुए तो उन्होंने यहां तक कहा कि खड़े हो जाओ, नहीं तो यहां से उठाकर बंद करवा देंगे। छात्रों से कहा कि ‘आप कम से कम अपना आत्मसम्मान तो रखो, अपने मां-बाप का तो पैर नहीं छूते, यहां लड़कों के पैर छू रहे हो’। इसके साथ ही उन्होंने वहां से चादरें हटवाने तक का निर्देश दिया लेकिन, उनके जाते ही फिर से सभी प्रत्याशी अपने पुराने की रौ में लौट आए।
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काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर खड़े तीनों दावेदारों को 80 मतदाताआें ने रिजेक्ट कर दिया। तीन में से किसी एक को चुनने की बजाय 80 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। इसी तरह महामंत्री पद पर हुई वोटिंग में 82 ने नोटा का बटन दिया। प्रमुख चार पदों पर कुल 288 ने नोटा का इस्तेमाल किया। वहीं चुनाव में अवैध वोट भी खूब पड़े। अध्यक्ष पद पर 19 अवैध मत पड़े। वहीं महामंत्री पद पर 25, उपाध्यक्ष पद पर 32 और पुस्तकालय मंत्री पद पर 26 अवैध वोट पड़े।
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काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ चुनाव में मतदान का प्रतिशत निराशाजनक रहा। रविवार को हुए मतदान में मतदाता पचास फीसदी का भी आंकड़ा पार नहीं कर पाए। इस साल महज 45.8 फीसदी ही मतदान हुआ जो कि पिछली बार से कम रहा। बीते साल 58.1 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।
काशी विद्यापीठ में रविवार को सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक वोटिंग हुई। इसमें शुरुआत के एक घंटे पांच फीसदी से कम वोटिंग हुई। वहीं दस बजे तक दस फीसदी वोटिंग हुई। दस बजे से एक बजे तक हर एक घंटे पर करीब दस-दस फीसदी वोटिंग हुई। मतदान के अंतिम एक घंटे में जहां वोटिंग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है थी लेकिन हुआ इसका ठीक उलटा। एक बजे तक 41.94 वोटिंग हुई। वहीं आखिरी एक घंटे में महज 3.9 फीसदी ही वोट पड़े।