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भदोही के लाल ने टीम इंडिया को बनाया अंडर-19 एशिया कप का चैंपियन, कभी बेचता था गोल-गप्पे

Wed, 10 Oct 2018 10:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के छोटे से जिले भदोही के लाल यशस्वी जायसवाल की आज हर ओर चर्चा हो रही है। गांव की गलियों से निकलकर अंडर-19 टीम इंडिया में खेल रहे यशस्वी जायसवाल ने अपनी बल्ले की धमक एशिया कप में भी जारी रखी। यशस्वी जायसवाल ने फाइनल में शानदार पारी खेलकर अपनी टीम को विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई और पूरे टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में नजर आए। यशस्वी जायसवाल का भारतीय टीम तक का सफर आसान नहीं रहा है। काफी मुश्किलों का सामना करने के बाद उन्होंने टीम इंडिया में जगह बनाई। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
अंडर-19 एशिया कप में यशस्वी जायसवाल ने दो शतक लगाए और टीम इंडिया की तरफ से सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी बने। टूर्नामेंट में दो शतक समेत सबसे अधिक रन बनाने के चलते यशस्वी को मैन ऑफ द सीरिज का खिताब दिया गया। टीम की ओर से बेहतर खेल दिखाने और फाइनल में अच्छी बल्लेबाजी करने से उसके परिवार वाले खुश हैं। उन्होंने मित्रों संग मिठाई बांटकर खुशी जताई।
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yashashvi - फोटो : अमर उजाला

एशिया कप के शुरूआती मैच से ही अपनी छाप छोड़ रहे यशस्वी ने श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में 113 गेदों में 8 चौकों और एक छक्के की मदद से 85 रन की धमाकेदार पारी खेली  जिससे टीम इंडिया 304 रन बना सकी। भारत ने श्रीलंका को 144 रन से हराकर एशिया कप पर कब्जा किया।

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varanasi - फोटो : अमर उजाला

करीब आठ साल से मुंबई में कोच ज्वाला सिंह की देखरेख में मैदान पर पसीना बहा रहे यशस्वी की प्रतिभा की सभी दाद देते हैं। यशस्वी जायसवाल का भारतीय टीम तक का सफर आसान नहीं रहा है। काफी मुश्किलों का सामना करने के बाद उन्होंने टीम इंडिया में जगह बनाई।  भारतीय टीम में पहुंचने के लिए यशस्वी को कभी भूखे पेट सोना पड़ा तो कभी उनको टेंट में रात गुजारनी पड़ी। यहीं नहीं यशस्वी को कई बार अपने खर्चे चलाने के लिए गोल-गप्पे भी बेचने पड़े। 
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मुंबई में यशस्वी के चाचा का घर इतना बड़ा नहीं था कि वो उसे साथ रख सकें। इसलिए उन्होंने  क्लब से अनुरोध किया कि वो यशस्वी को टेंट में रहने की इजाजत दें। इसके बाद अगले तीन साल तक यशस्वी आजाद मैदान के गार्ड के साथ टेंट में रहे।
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under 19 cricket team
परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उनके पिता कई बार कम पैसे भेजते थे। अपना खर्चा निकालने के लिए यशस्वी ने रामलीला के समय आजाद मैदान पर गोल-गप्पे भी बेचे, लेकिन इसके बावजूद कई बार रात को उन्हें भूखा भी सोना पड़ता था।


 
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