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काशी में मां काली का पूजन: पंचामृत स्नान के बाद दिव्य शृंगार, कलाकारों ने दी प्रस्तुति; सुर-लय-ताल की जुगलबंदी

Mon, 05 Oct 2026 12:31 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

काली मठ में पहली निशा पर पंचामृत स्नान के बाद मां काली का दिव्य शृंगार किया गया। इसके बाद कलाकारों ने भक्ति और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। सुर, लय और ताल की जुगलबंदी से पूरा वातावरण संगीतमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने मां काली के दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। आयोजन में देर शाम तक भक्तिमय माहौल बना रहा।
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मां काली का हुआ आकर्षक शृंगार। - फोटो : अमर उजाला
लक्सा स्थित लक्ष्मी कुंड के प्राचीन कालीमठ में 16 दिवसीय अनुष्ठान मेला के समापन पर मां काली के तीन दिवसीय शृंगार एवं संगीत महोत्सव का विधिवत शुभारंभ हुआ। महोत्सव की प्रथम निशा में मंदिर के महंत पंडित ठाकुर प्रसाद दुबे ने मां काली का पंचामृत स्नान कराया। इसके उपरांत माता का नूतन वस्त्र, दिव्य आभूषण और सुगंधित पुष्पों से अलौकिक रूप में शृंगार किया गया। इस दौरान 11 वैदिक ब्राह्मणों ने सस्वर वैदिक मंगलाचरण का पाठ किया, जिसके बाद मुख्य पुजारी पंडित विकास दुबे (काका गुरु) ने माता की भव्य महाआरती उतारी।
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मठ परिसर में श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
संध्या काल में गीतकार कन्हैया दुबे केडी के संयोजन में पूर्वांचल के नामचीन कलाकारों द्वारा गायन, वादन एवं नृत्य की त्रिवेणी प्रवाहित हुई। समारोह का शुभारंभ पंडित जवाहरलाल व साथी कलाकारों की शहनाई की मंगल ध्वनि और देवी गीतों की धुनों के साथ हुआ। इसके बाद कृष्णा मिश्रा के सितार और नवनीत के तबले की युगलबंदी में प्रस्तुत राग सरस्वती (रूपक ताल) ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु उपस्थित रहे। 
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति। - फोटो : अमर उजाला
मां लक्ष्मी को लगेगा 56 भोग, आज भजनों से सजेगी शाम
लक्सा स्थित प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर में 16 दिवसीय सोरहिया मेला के समापन पर महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली सहित सभी विग्रहों का छप्पन भोग शृंगार महोत्सव भजन संध्या के साथ आयोजित होगा। महंत शंकर पुरी महाराज ने बताया कि मंदिर को पुष्पों से सजाकर माता को 56 प्रकार के मिष्ठान और पकवान अर्पित किए जाएंगे। कन्हैया दुबे ‘केडी’ के संयोजन में डॉ. अमलेश शुक्ला, अर्चना तिवारी, ज्योति माही, जय चौरसिया और बाल कलाकार यथार्थ दुबे सहित पूर्वांचल के नामचीन कलाकार माता के दरबार में भजनों की प्रस्तुति देंगे।

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मठ परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला
देर रात तक गूंजते रहे देवी गीत और जयकारे
भजन संध्या में रमा सिंह ने हे जग जननी, आस्था शुक्ला ने लाल चूड़ियां चढ़ाऊ, और लोक गायक गोविंद गोपाल ने दुर्गा पंडाल ना दिखवला हे कक्का व महादेव महादेव की प्रस्तुति दी। डॉ. अमलेश शुक्ला ने काली मठ की महिमा जग में महान है और नमोस्तुते काली मैया नमोस्तुते सुनाया। व्यास मौर्य ने अंबे मैया प्यारी प्यारी तथा सरस्वती कृष्णमूर्ति ने तूने सबकी तरक्की की है सहित पारंपरिक देवी गीत व पचरा प्रस्तुत किए। 
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कलाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुति। - फोटो : अमर उजाला
कथक के भाव और तबले के बोल पर बजीं तालियां
महोत्सव में मांडवी सिंह, विशालाक्षी त्रिपाठी, शांभवी सेठ, व्याख्या और अनुकृति ने देवी स्तुति के साथ तोड़ा, टुकड़ा और तराना पर कथक नृत्य प्रस्तुत कर माता के चरणों में अपनी कला समर्पित की। वहीं, शिल्पा राय ने देवी स्तुति पर भाव नृत्य की प्रस्तुति दी।
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