दिन में तेज धूप और रात में गलन। मौसम में हो रहे बदलाव का असर सेहत पर पड़ रहा है। यही वजह है कि अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। कोई सर्दी, खांसी, बुखार से परेशान हैं तो किसी को नाक जाम, गले में खरास की शिकायत है। अस्पताल पहुंचने वालों में बच्चों की संख्या भी कम नहीं है। इनमें पेट संबंधी बीमारी से परेशान बच्चों की संख्या अधिक है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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varanasi
- फोटो : amar ujala
डॉक्टरों के मुताबिक ऐसे समय में अस्थमा, हृदय रोग के मरीजों को सावधानी बरतने की जरूरत है। सर्दी के शिकार बच्चे जरा सी लापरवाही पर निमोनिया के शिकार हो जा रहे हैं। बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, दीनदयाल अस्पताल, रामनगर अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों में सबसे अधिक सर्दी, खांसी, बुखार और सांस की तकलीफ वाले मरीज हैं।
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varanasi
- फोटो : amar ujala
औसतन दस दिन के भीतर मरीजों के आंकड़े में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में आम दिनों में जहां 80 से 100 के करीब मरीज आते थे वहीं पिछले दस दिनों से यह आंकड़ा 125 से 150 तक पहुंच जा रहा है। इस समय हृदय रोग, सर्दी, खांसी, बुखार, सांस की तकलीफ वाले अधिक आ रहे हैं।
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सर्दी से बचने के लिए अलाव के पास बैठे लोग
- फोटो : अमर उजाला
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वीके श्रीवास्तव का कहना है कि ऐसे मौसम में बच्चों की सेहत पर विशेष नजर रखने की जरूरत है। जरा सी लापरवाही पर निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों को पूरी बांह का कपड़ा पहनाएं और उनके खान-पान पर विशेष ध्यान दें।
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stomach diseases
दीनदयाल अस्पताल के फिजीशियन डॉ. पीके सिंह का कहना है कि इस मौसम में अस्थमा, टाइफाइड, डेंगू, मलेरिया के साथ ही अन्य संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलती हैं। बच्चों और बुजुर्गों को बेहद सावधान रहने की जरूरत है। लापरवाही गंभीर हो सकती है।
बरतें सावधानियां
- सुबह और शाम के समय गर्म कपड़ा पहनकर ही घर से बाहर निकलें
- मौसमी फल और हरी सब्जियों का सेवन करें
- सर्दी, खांसी, बुखार आदि आने पर तुरंत अस्पताल जाएं
- बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा न लें
- बच्चों की सेहत पर अभिभावक विशेष ध्यान दें