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विकास दुबे से भी ज्यादा कुख्यात था पूर्वांचल का यह माफिया, सालों हाथ न आने के बाद ऐसे हुआ अंत

Thu, 09 Jul 2020 10:17 AM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
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मुन्ना बजरंगी - फोटो : अमर उजाला
कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद विकास दुबे का नाम हर तरफ सुर्खियों में है। प्रदेश सरकार ने उस पर पांच लाख का इनाम घोषित किया था। आज सुबह उज्जैन (मध्य प्रदेश) में उसको गिरफ्तार कर लिया गया। पूर्वांचल के जौनपुर जिले का भी एक माफिया ऐसे ही पुलिस के लिए वर्षों तक चुनौती बना रहा। विकास दुबे से भी ज्यादा कुख्यात इस माफिया पर सात लाख का इनाम घोषित था। उसे भी विभिन्न राजनीतिक दलों का संरक्षण मिला। हालांकि वर्ष 2018 में उसकी जेल के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला
जौनपुर जिले के सुरेरी थाना क्षेत्र के पूरे दयाल गांव में वर्ष 1967 में जन्मा प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी पर 17 साल की उम्र में ही अवैध असलहा रखने और मारपीट का केस दर्ज हुआ था। वर्ष 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। इसके बाद वह जुम की दुनिया में बढ़ता ही चला गया। उसने कई हत्याएं कीं। इसमें ज्यादातर मामले रंगदारी से जुड़े रहे।
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Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 1993 में रामपुर के तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख कैलाश दुबे, छात्र नेता राजकुमार सिंह समेत तीन लोगों की जौनपुर के ही जमालापुर बाजार में दिनदहाड़े हत्या की। इस तिहरे हत्याकांड के बाद मुन्ना सुर्खियों में आया। पूर्वांचल में एके-47 का पहली बार इस्तेमाल भी मुन्ना ने ही किया था। 1996 में जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करने के बाद वह बाहुबली मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। 1996 में ही मुख्तार अंसारी ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से चुनाव लड़ा और विधायक बना।

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Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी के इशारे पर मुन्ना काम करने लगा। 29 नवंबर 2005 को मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की दिनदहाड़े हत्या कर दी। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर कृष्णानंद राय की दो गाड़ियों पर 400 से ज्यादा गोलियां चलाईं थी। इस हत्याकांड के बाद वह मोस्ट वांटेड बने मुन्ना पर सात लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया।
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ताबड़तोड़ वारदातों के बाद कुख्यात हो चुके मुन्ना को पकड़ने के लिए यूपी पुलिस के तेज तर्रार अफसरों वर्षों तक दिन रात एक कर दिया, मगर उसका सुराग लगा पाने में नाकाम रहे। अक्टूबर 2009 में दिल्ली पुलिस ने मुंबई के मलाड से जब मुन्ना को गिरफ्तार किया, तब उनके पास मुन्ना की 20 साल पुरानी तस्वीर थी, जिससे उसका चेहरा काफी बदल चुका था। मुन्ना बजरंगी ने अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में करीब 40 हत्याएं की। वर्ष 2018 में यूपी की ही बागपत जेल में उसकी हत्या कर दी गई। इसमें बदमाश सुनील राठी के अलावा कई बाहुबली नेताओं का भी नाम सामने आया था।
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माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी - फोटो : file photo
मुन्ना को मिलता रहा राजनीतिक संरक्षण
मुन्ना बजरंगी को भी राजनेताओं ने खूब संरक्षण दिया। मुंबई के एक बड़े कांग्रेस नेता की वर्षों तक उस पर सह रही। अन्य दलों में भी गहरी पैठ रखने वाले कुछ स्वजातीय नेता उसका संरक्षक बने। गिरफ्तारी के बाद अपना दल के टिकट पर चुनाव में भी अपनी और पत्नी का भाग्य आजमाया, मगर सफलता नहीं मिली।
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