देश की पहली सेमी हाईस्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस(Vande Bharat Express) का ट्रायल प्रयागराज-वाराणसी के बीच 2 फरवरी को हो चुका है। इसके बाद रेलवे अब उसके रूट को निश्चित करने में जुटा हुआ है। वाराणसी में ट्रेन-18 के पहुंचते ही उसका स्वागत एक सेलिब्रिटी की तरह किया गया। इस ट्रेन की सुविधाएं अत्याधुनिक है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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- फोटो : amar ujala
16 बोगियों की इस ट्रेन में दो बोगियां एग्जीक्यूटिव क्लास की हैं। इसमें 104 सीटें हैं। बाकी 14 बोगियां चेयरकार हैं। इनमें 11 बोगियों में प्रति बोगी में 78 सीटें हैं। बाकी तीन बोगियों में इंजन और चेयरकार बोगी संयुक्त हैं। इसकी वजह से एक बोगी में 44 सीटें हैं। वजह है कि इन तीन बोगियों में ही मोटर लगी हैं। सबसे आगे और सबसे पीछे दो मोटर इंजन और बीच में एक मोटर इंजन है।
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‘वंदे भारत’ में अनेकों खूबियां है, इस ट्रेन का हर दूसरा कोच मोटराइज्ड है जो स्पीड और ब्रेकिंग को उच्च श्रेणी का बनाता है। पूरी ट्रेन में सीसीटीवी कैमरे, जरूरत पड़ने पर यात्री लोको पायलट से बात कर सकते हैं। इमरजेंसी चेन की जगह बटन हैं, जिसे दबाते ही पायलट को सिग्नल मिलेगा और वह यात्री से संपर्क करेगा। कारण से संतुष्ट होने पर ही ट्रेन रुकेगी।
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ट्रेन-18 में वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध है। एग्जीक्यूटिव क्लास की सीटें 360 डिग्री घूम सकती हैं। प्रत्येक कोच में चार टीवी स्क्रीन हैं। रेलवे के मनोरंजन पैकेज का इन पर प्रसारण होगा। मोबाइल पर भी इसके कंटेंट को देखा जा सकेगा।
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देश में निर्मित इस ट्रेन का आयात होता तो लागत 200 करोड़ रुपये आती। इंटीग्ररल कोच फैक्ट्री में 97 करोड़ रुपये से 18 महीने में तैयार। इलाहाबाद से कानपुर के बीच आईआरसीटीसी भोजन परोसेगी। कुछ बोगियों में बेवरेज, स्नैक्स और भोजन के लिए स्थान बनाया गया है।
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महाप्रबंधक मोहन सिंह ने बताया कि टी-18 का किराया अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन यह शताब्दी के बराबर होगा। फिलहाल ट्रेन प्रयागराज और कानपुर में ठहरेगी। इस ट्रेन को मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन तक चलाने पर भी विमर्श हो रहा है। प्रधानमंत्री लोकार्पण के दौरान साथ आएंगे या दिल्ली में फ्लैग ऑफ करने के बाद काशी में स्वागत करेंगे, यह तय नहीं हुआ है।
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फिलहाल स्लीपर कोच वाली टी-18 का निर्माण शुरू हो गया है। ये राजधानी की जगह लेंगी। पहले चरण में चेयरकार वाली टी-18 ट्रेनें शताब्दी की जगह चलाई जाएंगी। यह बात उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक मोहन सिंह ने बताई थी। उन्होंने बताया कि प्रयागराज से वंदे भारत एक्सप्रेस के वाराणसी पहुंचने के तीन मार्ग हैं। इलाहाबाद जंक्शन-जंघई-वाराणसी, वाराणसी-व्यासनगर-इलाहाबाद जंक्शन और मंडुवाडीह-प्रयागराज रूटों को लेकर मंथन चल रहा है।
वहीं, रविवार को सूत्रों ने बताया कि वाराणसी-जंघई रूट से वंदे भारत एक्सप्रेस चलाई जा सकती है। वंदे भारत ट्रेन की रफ्तार दिल्ली से प्रयागराज तक 130 किलोमीटर प्रति घंटा और प्रयागराज से वाराणसी के बीच 110 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। उन्होंने कहा कि वाराणसी से दिल्ली जाने वाली ट्रेनें कम से कम 13 घंटे लेती हैं। टी-18 केवल साढ़े आठ घंटे में दिल्ली से वाराणसी पहुंचाएगी। इस रूट पर ट्रेन की स्पीड फिलहाल अधिकतम 130 किलोमीटर होगी। भविष्य में ट्रैक की बाड़बंदी के बाद ट्रेन को 160 की रफ्तार से चलाया जा सकेगा।