वाराणसी से 15 किलोमीटर दूर राजातालाब रेलवे स्टेशन के पास यूपी का दूसरा पेरिशेबल कार्गो बनकर तैयार है। शनिवार को इसका लोकार्पण पीएम मोदी के हाथों होना है। इस कार्गो सेंटर से न केवल बनारस बल्कि पूर्वांचल के अन्य जिलों के फल, सब्जी कारोबारियों को लाभ मिलेगा। मामूली चार्ज पर सेंटर में एक से छह माह तक फल, सब्जियां, सूखे फल रखे जा सकेंगे। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
भारतीय कंटेनर निगम लिमिटेड की ओर से बनाए गए इस कार्गो सेंटर को आईटीसी चलाएगी। आईटीसी के एरिया मैनेजर आशीष सिंह समेत यहां छह स्टाफ तैनात हैं। सिंह ने बताया कि इस कार्गो सेंटर में चार कूलिंग चैंबर हैं। सभी की क्षमता 100-100 टन की है। इसमें पहले से कोई बुकिंग की सुविधा नहीं है।
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राजातालाब में बना कार्गो सेंटर किसानों के लिए एक बड़ा तोहफा है। इस सेंटर में किसान मौसम के अनुरूप उगाई गई अपनी सब्जी व फल को संरक्षित कर सकेंगे। कार्गो सेंटर में चार बड़े बड़े एसी चैंबर हैं। प्रत्येक की क्षमता 100 मैट्रिक टन की है। यहां किसान आलू, गोभी, प्याज, मौसमी सब्जी, फल आदि को रखकर खराब होने से बचा सकेंगे। चैंबर में (-20) डिग्री तक तापमान किया जा सकेगा।
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राष्ट्रीय राजमार्ग व रेलवे स्टेशन के समीप लाइन के बीच में इस सेंटर के होने से आवागमन का बेहतर माध्यम भी मिलेगा। कॉनकोर भविष्य में इस कार्गो सेंटर का विस्तार भी कर सकती है। कार्गो सेंटर के निर्माण में चार करोड़ से अधिक रुपये खर्च हुए हैं जबकि 2500 वर्ग मीटर में यह सेंटर बना हुआ है।
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कॉनकोर इंडिया(कंटेनर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) ने सीएसआर के तहत इसे तैयार कराया। दो साल पहले जक्खिनी में आयोजित ग्राम संसद कार्यक्रम में रेल मंत्री ने किसानों के लिए कार्गो सेंटर की घोषणा की थी। क्षेत्र में सब्जी उत्पादन को देखते हुए किसानों के लिए कार्गो सेंटर की घोषणा की थी।
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अब यह पेरिशेबल कार्गो राजातालाब में न सिर्फ बनकर पूरा हो चुका है बल्कि इसके उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री का आगमन तक हो रहा है। ऐसे में स्थानीय गांव जक्खिनी, शहंशाहपुर, सिहोरवा, नरोत्तमपुर, बहादुरपुर, मरुई, इटही, धानापुर, पनियरा, बाबूराम कापुरा, ढढोरपुर, कृष्णदत्तपुर, जयापुर, चंदापुर, नरसणा गांव व आसपास के लोग खुश हैं कि उनकी आवश्यकता को सरकार ने समझा।
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फल व सब्जी संरक्षण के लिये फिलहाल कोई शुल्क निर्धारित नही है। सूत्रों की मानें तो प्रति किलो एक से ढाई रुपया मासिक शुल्क एक किसान को देना होगा। यहां संरक्षण का अलग-अलग तरीका होगा। पालक आदि के लिये कम समय का स्लैब होगा तो वहीं फल व ड्राईफ्रूट्स के लिए एक से तीन महीने तक संरक्षित किया जायेगा।