वाराणसी में संत रविदास जयंती पर हो रहे कार्यक्रम में इतिहास में पहली बार मुख्य मंच पर दो सिंहासन लगेंगे। अब तक चाहे जितने भी आयोजन हुए हैं सभी में संगत के मुख्य संत के लिए ही सिंहासन लगता था इस बार दो आसन लगाए जाएंगे। आगे की स्लाइड्स में जानें पूरा मामला...
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संत रविदास जयंती
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था देख रहे ट्रस्टी केएल सरोवा ने बताया कि योगी जी पहले संत हैं और फिर बाद में मुख्यमंत्री। संत रविदास परंपरा में सभी संतों का समान रूप से आदर किया जाता है। इसलिए उनके लिए कुर्सी लगेगी। सत्संग पंडाल को सजाने के लिए कोलकाता से कारीगर पहुंच चुके हैं।
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sir gobardhan
- फोटो : अमर उजाला
संत रविदास जयंती के दिन सत्संग पंडाल और मंच हर बार बनता है। हर बार कोई न कोई बड़ी राजनीतिक हस्ती भी इस समारोह में शिरकत करती हैं लेकिन सभी का आसन मुख्य संत के सिंहासन के नीचे ही लगता था। 2008 में मुख्यमंत्री मायावती स्वर्ण पालकी का अनावरण करने आयी थीं। तब यहां ऐतिहासिक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी लेकिन लेकिन मंच पर सिर्फ संत निरंजन दास ही सिंहासन पर विराजमान थे। मायावती सिंहासन के बगल में लगाए गए गद्दे पर बैठी थीं।
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संत रविदास जयंती
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2016 में केजरीवाल भी सत्संग पंडाल में आये लेकिन नीचे ही बैठे। मंच पर स्वर्ण पालकी और उसमें रविदास अमृतवाणी रखी जायेगी जो आकर्षण का केंद्र रहेगी। मंदिर के अलावा मंच पर सीएम योगी आदत्यिनाथ का रविदासिया धर्म की तरफ से सम्मान किया जाएगा।
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संत रविदास जयंती
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संत रविदास जयंती पर बुधवार को वाराणसी आएंगे। वह हेलीकॉप्टर से बीएचयू हेलीपैड पहुंचेंगे। बीएचयू से वह संत रविदास की जयंती कार्यक्रम में हिस्सा लेने सीर जाएंगे। रविदास मंदिर में दर्शन पूजन के बाद वह बीएचयू हेलीपैड और यहां से लखनऊ रवाना हो जाएंगे।
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संत रविदास जयंती
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संत निरंजन दास के साथ आए विदेशों से आए सेवादारों ने भी सेवादार का जिम्मां संभाल लिया है। बेगमपुरा स्पेशल ट्रेन में रास्ते भर वह सेवादार का कर्तव्य निभाते आए हैं। पंजाब, जालन्धर, पंजाब समेत विदेशों से आए श्रद्धालुओं का सेवा भाव काबिले तारीफ है। पूरे मेला क्षेत्र में बिना मजदूरों के ही सारा काम हो रहा है।
सीर गोवर्धनपुर में लगने वाले मेले में करोड़ों रुपये का करोबार होगा। गुरू के दर पर आये श्रद्धालु जमकर खरीददारी भी करते हैं। बनारसी साड़ी, गहने, कारपेट, कॉस्मेटिक प्रसाधन सहित खाने पीने, खिलौने सहित बनारसी मिठाइयों की जमकर खरीददारी हो रही है। राजघाट स्थित रविदास मंदिर के आस-पास घाट की सीढि़यों पर चादर बिछा कर खाने- पीने के साथ ही चूड़ी, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, खिलौने, तांबा के बर्तन समेत अन्य सामान बेचे जा रहे हैं।