अंग्रेजों के जमाने के बने नील गोदाम की जिस दीवार पर बैठ कर दोस्तों की टोली मस्ती किया करती थी वह उनके लिए मंगलवार को काल बन कर आई। दीवार अचानक भरभरा कर गिर गई। मलबे में दबने से तीन दोस्तों की मौक पर ही मौत हो गई जबकि एक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। यह नील गोदाम गांव के बाहर नदी के किनारे स्थित था जहां लोग समय गुजारने लिए आते थे। हादसे ने दो परिवार से उनका इकलौता चिराग छीन लिया। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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- फोटो : अमर उजाला
घटना गाजीपुर जिले के मेहरल्लीपुर (भवरी) गांव की है। यहां बेसो नदी के किनारे नील गोदाम की ढाई फीट चौड़ी दीवार मंगलवार को ढह जाने से चार युवकों की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया। मेहरल्लीपुर निवासी चिरकुट बिंद का पुत्र रमेश बिंद (22), केवल बिंद का पुत्र धर्मेंद्र (21), महेंद्र बिंद का पुत्र उमेश (20), बेचन बिंद का पुत्र अच्छेलाल (21) और रामध्यान बिंद का पुत्र गुड्डू (20) मंगलवार सुबह दस बजे बेसो नदी के किनारे अंग्रेजों के जमाने के बने नील गोदाम के पुराने खंडहर के पास धूप ले रहे थे।
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करीब साढ़े 11 बजे दीवार एकाएक हिलने लगी और देखते ही देखते ढह गई। हादसे की खबर लोगों तक जैसे ही पहुंची लोगों के पैर घटना स्थल की तरफ बढ़ गए। कुछ ही देर में हजारों लोग मौके पर पहुंच गए। शव देखते ही नदी किनारे की शांत वातावरण में मृतकों के परिजनों की चीख-पुकार गूंजने लगी। रोज की तरह मंगलवार को गांव बिल्कुल शांत था। जैसे ही इस बात को लेकर शोर होने लगा कि बेसो नदी किनारे स्थित नील गोदाम की दीवार गिर पड़ी है और उसमें गांव के चार लड़के दब गए हैं, लोगों में हड़कंप मच गया।
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उन लोगों की बेचैनी अधिक बढ़ गई, जिन परिवार के लड़के घर पर नहीं थे। ऐसे लोग बिना जूता-चप्पल पहने इस आशंका से घटना स्थल की तरफ दौड़ पड़े कि कहीं उनके घर का लड़का तो दीवार में नहीं दबा है। मृतकों के परिजन मौके पर पहुंचे और उनका शव देखा तो वे बदहवास हो गए। खुले आसमान के नीचे चारों युवकों के शव पड़े थे। हर शव के पास बैठकर परिवार की महिला-पुरुष सहित बच्चे बिलखते रहे थे। यह मंजर देख वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। इस दौरान सांत्वना देने वालों की आंखें भी छलछला जा रही थीं।
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मेहरल्लीपुर उर्फ भवरी गांव के चार युवकों की मौत ने ग्रामीणों को झकझोर के रख दिया है। गांव के किनारे से गुजरी बेसो नदी की लहरें भी पूरे दिन खामोश रहीं। शायद युवकों की मौत से वह भी गमजदा हो उठी...। जिस नदी के पास प्रतिदिन गांव के चारो युवा आते जाते थे आज उसी नदी के पास स्थित जर्जर नील गोदाम की दीवार मौत बन जाएगी यह किसी ने नहीं सोचा था। गांव में परिजनों की उठने वाली चीत्कार से गांव का कोना कोना गमगीन हो उठा था...हर तरफ यही सवाल तैर रहा था यह सब क्या हो गया और कैसे हो गया।
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नील गोदाम की दीवार ने दो परिवार से उनका इकलौता चिराग छीन लिया। घटना की जानकारी होते ही अन्य लोगों के साथ उमेश और रमेश के माता-पिता सहित परिवार के अन्य सदस्य पहुंचे। जैसे ही उनकी नजर इंटर के छात्र मृतक उमेश और रमेश पर पड़ी, वह दहाड़े मारकर चीखने-चिल्लाने लगे। माता-पिता बिलखते हुए यह कहने लगे कि हे ईश्वर तुमने यह क्या कर दिया। हम लोगों के बुढ़ापे की लाठी हमसे छीन हमें बेसहारा कर दिया। अब किसके सहारे हमारा बुढ़ापा कटेगा। इनकी इस व्यथा को सुन वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो जा रही थीं।
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हादसे के गवाह गुड्डू की आंखों में घटना का मंजर साफ दिखाई दे रहा था। देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि भले ही वह अस्पताल के बेड पर था, लेकिन उसका दिलो-दिमाग घटना स्थल पर है, जो लोग भी उसका हाल-चाल जानने के लिए जा रहे थे, वह नजरों को इधर-उधर नचाते हुए उन्हें देख रहा था। पूछने पर लड़खड़ाती हुए जुबान में घायल गुड्डू बोलते बोलते रो पड़ा। घायल गुड्डू की तबीयत उपचार के बाद ठीक हो जाएगी, लेकिन शायद वह दुर्घटना के इस मंजर को ताम उम्र नहीं भूल पाएगा।
घायल को अस्पताल ले जाते पुलिसकर्मी
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मृतक के परिवार के लोग बिलखते हुए बार-बार दीवार के मलबों को निहारते रहे, जिनमें दबकर रमेश, धर्मेंद्र, उमेश और अच्छेलाल की मौत हुई। कई लोग उसी मलबे पर खड़ा होकर रोते-बिलखते परिजनों और शव को देखते रहे, जिसके नीचे दबने से युवकों की मौत हो गई। दु:खी मन से ग्रामीण यह चर्चा करते रहे कि वर्षों पुरानी यह दीवार आज चार युवकों के काल का कारण बन गई। लोग आपस में यह बातें करते रहे कि दीवार का कुछ हिस्सा अभी बचा है, जो पूरी तरह से जर्जर है और कभी भी गिर सकता है।