होलिका दहन पर देश भर में अलग-अलग रस्मों और मान्यताओं के बारे में आपने सुना होगा। आजमगढ़ के एक गांव में भी होलिका दहन पर अनोखी मान्यता है। यहां होलिका की आग में निर्वस्त्र होकर कुछ लोग लिट्टी सेंकतें हैं। खास बात यह कि इस लिट्टी को खाने के लिए दूसरे गांव तो छोड़िए दूसरे प्रदेश से भी लोग आते हैं। आगे की स्लाइड्स में जानिए पूरा मामला...
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होलिका
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बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है होलिका दहन। यह बताती है कि आपकी मजबूत इच्छाशक्ति आपको सारी बुराईयों से बचा सकती है, जैसे प्रह्लाद की थी। इसी लिए आज भी होली के त्यौहार पर होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन पर कुछ जगहों की अपनी अपनी मान्यता भी होती है। एक ऐसी ही खास और अनोखी मान्यता आजमगढ़ के एक गांव में है।
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होलिका दहन
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कहते हैं कि होली का सम्मत जलते ही बहुत से दुखों का अंत हो जाता है। लेकिन होली के सम्मत में बनी लिट्टी खाने से मिर्गी और फरका जैसी बिमारी ठीक होती है, ऐसा पहली बार देखने को मिला है। यहां होलिका के आग में निर्वस्त्र होकर जौ की लिट्टी सेंकी जाती है। इस खास लिट्टी को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने के लिए कई राज्यों के लोग इस गांव में आते हैं। कहा जाता है कि यह लिट्टी खाने से मिरगी और फरका जैसे रोग का नाश होता है। यह गांव है सगड़ी तहसील क्षेत्र का झंझवा तुरकौली गांव।
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होलिका दहन
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इस पर लोगों को पूरा यकीन है। यही वजह है कि होलिका दहन पर दूर-दूर के लोग आते हैं और लिट्टी का सेवन करते हैं। इस दिन पूरे गांव में मेले जैसा माहौल रहता है। लोगों का मानना है कि लिट्टी खाने से तीन से पांच साल के अंदर मिरगी और फरका रोग जड़ से समाप्त हो जाता है। झंझवा निवासी 66 वर्षीय राम पलट चौहान और 63 वर्षीय पतिराम चौहान बताते हैं कि होलिका दहन के बाद सुनसान हो जाने पर होलिका दहन स्थल पर निर्वस्त्र होकर हम लोग जौ की लिट्टी पकाते हैं। इस दौरान यह भी ध्यान रखा जाता है कि लिट्टी पकाते समय अगल-बगल कोई न हो, और न ही कोई रोक-टोक करे।
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होलीका दहन
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लिट्टी पकाने के बाद हम लोग पूरे गांव में घूम-घूम कर दूर-दराज से आए लोगों को लिट्टी खिलाते हैं। लगातार तीन से पांच साल तक लिट्टी खाने से मिर्गी और फरका रोग जड़ से समाप्त हो जाता है। यह लिट्टी खाने के लिए लोग बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश से आते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता मेडही चौहान लिट्टी बनाकर दवा के रूप में खिलाते थे। उनकी मृत्यु के बाद हम यह काम करता हूं। इस नेक काम करने से मन को बड़ी शांति मिलती है।
गांव के ओमप्रकाश, बुधनी, पूजा, उर्मिला, ज्योति, बबलू, रामसेवक आदि ने बताया कि हम लोग कई वर्षों से लिट्टी खा रहे हैं, हमें बहुत फायदा हुआ है। लोगों ने बताया कि लिट्टी खाने के बाद कोई भी व्यक्ति इस गांव का अन्न, जल ग्रहण नहीं करता है। साथ ही गांव का सिवान छोड़ कर चला जाता है, तभी उसको लाभ होता है।