फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बनारस का यह चर्च है बड़ा खास, यहां प्रभु यीशु के शिष्य ने की थी आराधना

Tue, 24 Dec 2019 02:34 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
1 of 5
सेंट थॉमस चर्च। - फोटो : अमर उजाला।
काशी अपनी प्राचीनता और विविधता के लिए विश्व विख्यात है। यहां सभी धर्मों के लोग एकता के साथ अपने-अपने ईस्टों की आराधना करते आए हैं। कई धार्मिक केंद्र इतने प्राचीन हैं कि इनके निर्माण व निर्माता के बारे में स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है। लेकिन संतों और यात्रियों के विवरणों के आधार पर इनके महत्व के बारे में पता चलता है। ऐसे ही धार्मिक केंद्रों में से एक है सेंट थॉमस चर्च, जो कि एकता को तो दर्शाती है साथ ही काशी की पहचान भी है।
विज्ञापन

2 of 5
चर्च के पादरी स्टीवंस बताते हैं कि इसकी दीवारों पर कोई शिलालेख नहीं है, जिससे इस चर्च के निर्माण के बारे में पता चल सके। माना जाता है कि प्रभु ईसा के 12 शिष्यों में से एक सेंट थॉमस ने 52ईस्वी से 72ईस्वी के दौरान वहीं एक शिष्य थे जो रोमन साम्राज्य से आकर यहां ईसाई धर्म का प्रचार करते थे। माना जाता है कि वह अरब सागर पार करके 52ईस्वी में केरल में आए थे, जहां उन्होंने ईसाई धर्म का प्रसार किया था।
विज्ञापन

3 of 5
सेंट थॉमस भारत यात्रा के दौरान मद्रास से चलकर काशी पहुंचे थे। यहां उन्होंने गिरजाघर इलाके में प्रवास किया था, जहां उस वक्त जंगल हुआ करता था। प्रवास के दौरान वह क्रूस लगाकर आराधना करते थे। यहीं पर उन्होंने अपना यात्रा वृत्तांत भी लिखा था। बाद में वह मद्रास लौट गए और वहीं रह गए। बाद में ईस्ट इंडिया कंपनी के एक सिपाही जॉन थोमर ने सेंट थॉमस के यात्रा वृत्तांत को पढ़ा और यहां आकर उस जगह की खोज की, जहां सेंट थॉमस ने प्रवास के दौरान प्रभु यीशु की आराधना की थी। फिर यहां चर्च का निर्माण कराया और उसे सेंट थॉमस चर्च नाम दिया।

4 of 5
चर्च में पूजा करने वाले डेविड ने कहा कि ईंटों की संरचना को देखकर लगता है कि यह चर्च 1700 ईस्वी के बाद का है। कभी गोदौलिया पर उस जगह प्रभु ईसा मसीह की शिष्य ने आराधना की थी जहां सेंट थॉमस चर्च है। यह समूचा इलाका आज गिरजाघर के नाम से मशहूर है। पहले यहां जंगल था।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
पादरी ने बताया कि देश के सबसे प्राचीन गिरजाघरों में से एक चर्च ईस्ट इंडिया कंपनी शासनकाल की अनूठी वास्तुकला का दस्तावेज है। यह चर्च चर्चेंज ऑफ नार्थ इंडिया(सीएनआई) द्वारा संचालित होता है। चर्च में देश-विदेशी सैलानी यहां आते है, वो प्रभु ईसा की आराधना के साथ ही चर्च का इतिहास जानकार अभिभूत हो उठते हैं। चर्च के बाहर एक बुजुर्ग चाय विक्रेता की माने तो वो इस चर्च को अपने बचपन से देखता आ रहा है, उस समय चर्च की ऊंचाई आसपास के इमारतों से भी ऊंची थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें