जिनके पास आगे बढ़ने का जज्बा है, कुछ कर दिखाने की जिद है, शिखर छूने का जुनून है, उनकी राह में कोई मुश्किल चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो कभी बाधा नहीं डाल सकती। बनारस के ऐसे ही जज्बावान हैं, होनहार हाकी खिलाड़ी सुमित। भारतीय हाकी टीम में अपनी जगह पक्की कर सुमित ने एकबारगी फिर काशी की धाक जमा दी है। सुल्तान अजलान शाह कप हाकी में वह भारतीय टीम की तरफ से अपना हुनर दिखाएंगे। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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सुमित का अब तक का यह सफर उन तमाम युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो मुश्किलों, संघर्षों से जूझकर अपने सपनों में रंग भरने में जुटे हैं। टैक्सी चालक पिता रामजी गौड़ और मां शम्भा देवी के साथ ही समूची काशी आज अपने लाल के इस कमाल से गौरवान्वित है। सुमित का स्टिक पर कमाल का कमांड है। फील्ड पर मूवमेंट भी काफी तेज है।
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काशी की धरती से मोहम्मद शाहिद, विवेक सिंह, राहुल सिंह जैसे पूर्व ओलंपियनों की लंबी फेहरिस्त है। ओलंपियन राहुल सिंह से हाकी की बारीकियां सीखकर नेशनल टीम में जगह बनाने वाले सुमित की उपलब्धि इस नजरिए से और खास बन जाती है कि वह एक बेहद सामान्य परिवार से हैं।
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शिवपुर मिनी स्टेडियम के पास रहने वाले सुमित के पिता रामजी गौड़ टैक्सी चलाकर बमुश्किल इतना ही कमा पाते हैं कि परिवार का गुजर-बसर हो जाए। मां शम्भा देवी गृहिणी हैं। हॉकी में कॅरियर बनाने निकले बेटे सुमित के राष्ट्रीय टीम में चुने जाने की जानकारी पाकर उनकी आंखें छलक आईं।
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सेंटर फारवर्ड से खेलने वाले सुमित ने पिछले साल जूनियर इंडिया टीम में खेला था। ओलंपियन विवेक सिंह हॉकी एकेडमी के प्रशिक्षु सुमित ने हाल ही में वाराणसी में आयोजित अखिल भारतीय विवेक सिंह हॉकी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया था। उनके कोच ओलंपियन राहुल सिंह बताते हैं कि सुमित और उसका बड़ा भाई अमित दोनों हाकी को लेकर बेहद जुनूनी थे।
सुमित के बड़े भाई अमित ने बताया कि उनके पिता रामजी गौड़ टूरिस्ट टैक्सी चलाते हैं। शुरू से ही उनका सपना था कि हम लोग देश के लिए खेलें और अच्छा करें। अब छोटा भाई टीम इंडिया के लिए चुना गया है। हम सब बहुत खुश हैं। पिताजी का यही आशीर्वाद है कि वह टीम को इंडिया को चैंपियन बनाए।