सोमवती अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है। सोमवार को सुहागिन महिलाएं पति के दीर्घायु होने की कामना के लिए व्रत रखेंगी। आगे की स्लाइड में जानें सोमवती अमावस्या का महत्व और व्रत विधान...
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- फोटो : getty
महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति के मुताबिक पुराणों में कहा गया है कि इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल प्राप्त होता है। वहीं किसी भी पुण्य कार्य को सोमवती अमावस्या को करने से अनन्तगुणा फल की प्राप्ति होती है।
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सूरज चांद
उन्होंने बताया कि सोम का अर्थ चन्द्रमा से होता है। ऐसे में चन्द्रयुक्त अमावस्या एक दुर्लभ संयोग है। इस दिन स्नान, ध्यान, दान, व्रत से मानव के नकारात्मक विचारों, शक्तियों का नाश होता है। अाज सोमवती अमावस्या के साथ सूर्यग्रहण भी है।
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हालांकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, अत: इसका यहां कोई प्रभाव नहीं होगा। विशेषकर सोमवार को भगवान शिवजी का दिन माना जाता है। इसलिए सोमवती अमावस्या पर शिवजी की आराधना, पूजा और अर्चना उन्हीं को समर्पित होती है।
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शिव पार्वती
सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना करते हुए पीपल के वृक्ष में शिवजी का वास मानकर उसकी पूजा और परिक्रमा करती हैं। ऐसा माना गया है कि पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में शिवजी तथा अग्रभाग में ब्रह्माजी का निवास होता है। अत: इस दिन पीपल के पूजन से सौभाग्य की वृद्धि होती है।
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बलुआ गंगा घाट पर पितरों को श्राद्ध देने के लिए जुटे लोग।
- फोटो : chandauli
उन्होंने बताया कि सोमवती अमावस्या के दिन पीपल की परिक्रमा करने का विधान है। उसके बाद गरीबों को भोजन कराया जाता हैं। सोमवती अमावस्या के दिन की यह भी मान्यता है कि इस दिन पितरों को जल देने से उन्हें तृप्ति मिलती है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर तीर्थस्थलों पर पिंडदान करने का विशेष महत्व है।
सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी परिक्रमा करें। इस दिन सूर्य नारायण को जल देने से दरिद्रता दूर होती है। चातुर्मास महायज्ञ के प्रधान आचार्य काशी के प्रकाण्ड वैदिक विद्वान आचार्य रामशंकर द्विवेदी जी ने बताया कि साल 2017 में सोमवती अमावस्या भाग्यवश दो बार आएगी। पहली बार सोमवार 21 अगस्त को भाद्रपद अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी एवं दूसरी बार सोमवार 18 दिसंबर को पौष अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी।