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'स्मार्ट सिटी' वाराणसी की महिलाएं भी हुईं स्मार्ट, घर बैठे बन गईं 'बिजनेस वूमेन'

Thu, 11 Jul 2019 03:56 PM IST
Sayali Maurya पूजा सिंह, अमर उजाला, वाराणसी
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घर बैठे ही शहर की महिलाएं बिजनेस वूमेन बन गईं हैं। होम मार्केटिंग, ऑनलाइन बिजनेस ने उनकी जिंदगी बदल दी है। दो-तीन लोगों से शुरू हुआ उनका काम आज उन्हें एक अच्छी खासी इनकम दिला रहा है। महिलाएं कंपनियों के लिए होम मार्केटिंग का काम कर रही हैं। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
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स्मार्ट सिटी वाराणसी की महिलाएं भी अब स्मार्ट होती जा रही है। व्यवसाय का जरिया घर में ही तलाशना महिलाओं से बेहतर कोई नहीं जानता। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर की हेल्थ केयर, पर्सनल केयर, कॉस्मेटिक कंपनियों के साथ घरेलू मसाले के बिजनेस ने उन्हें एक नई पहचान दिलाई है। घरेलू महिलाएं अपने संपर्क के दम पर हर साल खासा बिजनेस कर रही हैं। 
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रिनजु सिंह - फोटो : अमर उजाला
घर बैठे हेल्थ केयर कंपनियों की मार्केटिंग कर प्रोडक्ट सेलिंग का काम करने वाली डीएलडब्ल्यू निवासी रिनजु सिंह ने होम मार्केंटिंग ऑनलाइन बिजनेस इसलिए चुना क्योंकि यह फैमिली फ्रेंडली है। वे बताती हैं मुझे कंपनी का कोई भी प्रोडक्ट मंगाना हो ऑनलाइन ऑर्डर बुक कर के कोरियर से घर पर मंगाती हूं। घर पर सामान आता है और सेल हो जाता है।

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रजनी जैन - फोटो : अमर उजाला
लंका निवासी रजनी जैन ने खुद के पैरों पर खड़े होने का सपना देखा था। परिवार ने साथ दिया तो घर से ही मसाले का बिजनेस शुरू किया। आज घर बैठे मसाले का बिजनेस उनका बेस्ट फ्रेंड बन चुका है। रजनी बताती हैं कि हल्दी को शुभ माना जाता है इसलिए सबसे पहले अपनी मां और सास के साथ इस बिजनेस की शुरुआत की। अकेले शुरू किए गए इस बिजनेस में आज तीन से चार स्टॉफ हो गए हैं। सोचा नहीं था कि इतने बड़े लेवल पर जाऊंगी बस मैंने अपने कांटेक्ट यूज किए। मोबाइल और सोशल नेटर्विंक की वजह से आज डेढ़ साल में 400 कस्टमर बन गए है, जिसमें 15 रेग्यूलर कस्टमर हैं।
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संध्या सिंह - फोटो : अमर उजाला
चितईपुर निवासी संध्या सिंह पिछले तीन सालो से ऑनलाइन बिजनेस कर रही है। संध्या बताती है घर पर ही फ्री टाइम में बोर होती थी, सोचा कुछ शुरू करू। मैनें फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया था। बच्चों की जिम्मेदारी के बीच अपना सपना पीछे छूट गया था। बच्चे बड़े हो गए तो अपना बुटीक का काम शुरू किया। पहले तो अपने जान पहचान वालों के लिए कपड़े डिजाइन करती थी, पर आज फेसबुक, व्हाट्सएप के जरिए मुझे ऑर्डर मिलने लगे हैं। मेरी डिजाइन के बदौलत कई ऑर्डर तो बनारस के बाहर से भी आने लगे हैं। धीरे-धीरे काम जम गया। घर से बाहर निकलना मुश्किल होता हैं। घर में दिन भर मन भी नहीं लगता, इसलिए मैंने इस काम को शुरू किया।
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