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रामलीला: तोप की गर्जना के साथ दो सेकंड में शिव धनुष के हुए दो टुकड़े, राम के गले में सीता ने डाली वरमाला

Wed, 30 Sep 2026 12:04 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में रामनगर की रामलीला में तोप की गर्जना के साथ दो सेकंड में शिव धनुष के दो टुकड़े हुए। जिसके बाद मशाल और पेट्रोमैक्स की दूधिया रोशनी और तोप की भयंकर गर्जना के बीच माता सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में जयमाला डाली।
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रामनगर की रामलीला - फोटो : अमर उजाला
तेहि छन राम मध्य धनु तोरा, भरे भुवन धुनि घोर कठोरा ... अर्थात् श्रीराम ने कब धनुष को हाथ में लिया, कब उसकी प्रत्यंचा चढ़ाई और कब उसे जोर से खींचा, यह इतनी फुर्ती से हुआ कि किसी को पता ही नहीं चला। सबने उन्हें सिर्फ धनुष ताने खड़े देखा। उसी क्षण श्री राम ने धनुष को बीच से तोड़ दिया। धनुष टूटते ही तीन सेकंड के भीतर पूरे ब्रह्मांड में गर्जना हुई। रामलीला के पांचवें दिन मंगलवार को धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर का मंचन हुआ। प्रभु श्रीराम द्वारा शिव धनुष का भंजन करते ही पूरा जनकपुर ‘बोल दे राजा रामचंद्र की जय’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। मशाल और पेट्रोमैक्स की दूधिया रोशनी और तोप की भयंकर गर्जना के बीच माता सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में जयमाला डाली।
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रामनगर की रामलीला - फोटो : अमर उजाला
शाम 6:30 बजते ही जनकपुर की ओर जाने वाले हर मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी चहलकदमी शुरू हो गई। धनुष यज्ञ और सीता-राम के अलौकिक मिलन के साक्षी बनने की लालसा में लोग पहले ही मंच के इर्द-गिर्द स्थान घेरने में जुट गए। शाम सात बजे तक समूचा परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भर चुका था। सबकी निगाहें मंच पर मुनि विश्वामित्र के साथ विराजमान श्रीराम और लक्ष्मण पर टिकी थीं। इसी बीच हाथी पर सवार होकर रावण भी स्वयंवर में शामिल होने पहुंचा।
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रामनगर की रामलीला - फोटो : अमर उजाला
शाम 7:15 बजे तक रंगभूमि में राजा जनक का प्रण सुनकर देश-देशांतर से आए राजा-महाराजाओं ने धनुष उठाने का भरसक प्रयास किया, पर वे उसे हिला तक न सके। राजा जनक ने व्याकुल होकर कहा कि यदि जानता कि पृथ्वी वीरों से विहीन है, तो यह प्रण कभी न करता। जनक के कटु वचन सुनकर लक्ष्मण कुपित हो उठे और गरजते हुए बोले कि वह संपूर्ण ब्रह्मांड को कच्चे घड़े की भांति फोड़ सकते हैं, फिर यह धनुष क्या चीज है।
 

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रामनगर की रामलीला - फोटो : अमर उजाला
शाम 7:45 बजते ही लक्ष्मण का क्रोध देख मुनि विश्वामित्र ने श्रीराम को संकेत किया। रामायणियों के स्वर ‘गुरूहिं प्रणाम मनहि मन कीन्हा...’ के साथ प्रभु उठे। समूची रंगभूमि में एक पल के लिए वक्त ठहर-सा गया। जैसे ही चौपाई गूंजी ‘तेहिं छन राम मध्य धनु तोरा’, प्रभु ने प्रत्यंचा खींचते ही धनुष को झटका दिया और वह दो सेकंड में दो टुकड़ों में बिखर गया। ठीक उसी क्षण 36वीं वाहिनी पीएसी परिसर से दागी गई तोप की गर्जना हुई। इसके बाद माता सीता ने श्रीराम को वरमाला पहनाई।
 
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रामनगर की रामलीला - फोटो : अमर उजाला
रात 8:30 बजे धनुष टूटने की ध्वनि सुन क्रोधित परशुराम पहुंचे, जहां उनका लक्ष्मण से तीखा संवाद हुआ। अंततः श्रीराम के शांत वचनों और अपना वैष्णव धनुष चढ़ाते ही परशुराम का संशय दूर हुआ। वे प्रभु की स्तुति कर लौट गए। राजा जनक ने अयोध्या बारात का निमंत्रण भेजा और आरती के साथ पांचवें दिन की लीला संपन्न हुई।

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