महाशिवरात्रि पर शुक्रवार को उत्सव, उल्लास से भरी काशी का हर कोना शिवमय हो गया। देवाधिदेव महादेव के दरबार में हाजिरी लगाने के जतन आम श्रद्धालुओं से लेकर अफसरों, मंत्रियों तक ने किए। महाशिवरात्रि पर काशी में निकली अनूठी शिव बारात की खास झलक भी देखने को मिली। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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महाशिवरात्रि
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी की सड़कों पर पैदल श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का रेला द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा विश्वनाथ की झलक पाने के लिए भोर से लेकर रात तक बेताब रहा। हाथों में कलश लिए बच्चों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों ने लंबी कतार में लगकर अपनी बारी की प्रतीक्षा की।
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देवाधिदेव महादेव के दरबार में हाजिरी लगाने के जतन आम श्रद्धालुओं से लेकर अफसरों, मंत्रियों तक ने किए। केंद्रीय जल संसाधन, गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती, राज्य सभा सदस्य अमर सिंह, मुख्य सचिव राहुल भटनागर समेत कई नेताओं, अफसरों ने बाबा का जलाभिषेक किया। रात आठ बजे तक 2.50 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई।
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दशाश्वमेध पुलिस बूथ से गोदौलिया, गिरजाघर होते हुए मजदा सिनेमा (लक्सा) तक लंबी कतार तो थी ही, इसी तरह नीचीबाग से चौक, बांसफाटक होते हुए छत्ताद्वार तक लोग लाइन में लगे थे। गोदौलिया से छत्ताद्वार के बीच के मार्ग पर श्रद्धालुओं के अलावा किसी के चलने की छूट नहीं थी। भोग आरती के समय श्रद्धालुओं को आधे घंटे के लिए रोके जाने की वजह से कई जगह धक्कामुक्की भी हुई। फिर भी श्रद्धालु हर हर महादेव के जयकारे लगाते रहे।
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महाशिवरात्रि पर मंगला आरती में भीड़ के चलते असहज स्थिति बन गई। टिकट सिर्फ चार सौ जारी हुए थे, जबकि मंगला आरती के दर्शन के लिए आठ सौ से अधिक लोग पहुंच गए। इस वजह से मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालु टिकट लेने के बावजूद मंगला आरती के दर्शन से वंचित रह गए। पुलिस ने कई श्रद्धालुओं को रोक दिया। इस वजह से शोर-शराबा भी हुआ।
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महाशिवरात्रि पर वाराणसी के कैथी में मार्कंडेय महादेव मंदिर के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। गंगा-वरुणा के संगम में डुबकी लगाने के बाद भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक किया। गुरुवार को रात 12 बजे से ही लंबी कतारें लग गईं। भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस पसीना बहाती रही। पुलिस-प्रशासन के मुताबिक शनिवार को शाम तक पांच लाख से ज्यादा भक्तों ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई।
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वाराणसी की सड़कों पर पैदल श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का रेला द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा विश्वनाथ की झलक पाने के लिए भोर से लेकर रात तक बेताब रहा। हाथों में कलश लिए बच्चों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों ने लंबी कतार में लगकर अपनी बारी की प्रतीक्षा की।
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महाशिवरात्रि पर काशी में निकली अनूठी शिव बारात की यह एक खास झलक थी। इसमें चार देशों के पर्यटक विविध वेश में बाबा के बाराती बनकर शामिल हुए। 35 साल से सहबल्ला बनते आ रहे हास्य कवि सांड़ बनारसी का प्रमोशन कर उन्हें दूल्हा बनाया गया। दुल्हन बने बुनकर नेता अतीक अंसारी।
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कई रथों पर विदेशी
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बैलगाड़ियों, बग्घियों और घोड़ों से सजी बारात रात करीब आठ बजे मृत्युंजय महादेव (दारानगर) से निकली तो छतों, बारजों से लेकर सड़कों की पटरियों पर कतारबद्ध काशीवासियों का हुजूम उमड़ पड़ा। अब तक दूल्हा रहे पं. धर्मशील चतुर्वेदी का चित्र बारात में शामिल किया गया।
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पहली बार दूल्हा बने हास्य कवि सांड़ बनारसी
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बैंड पार्टियां अलग से इस माहौल को उत्सवमय बना रही थीं तो शहनाई की धुन पर संगीतमय माहौल में झूमते बाराती अलग ही आकर्षण का केंद्र बने थे। भूत-प्रेत के स्वरूप में बच्चे, बुजुर्ग और युवा निकले। बारातियों के गले में मुंडों की माला भी थी और सांप भी। 10 बैलगाड़ियों पर अनूठी झांकियां चल रही थीं। एक बैलगाड़ी पर लोग नाच रहे थे तो दूसरी बैलगाड़ी पर पद्मभूषण छन्नूलाल मिश्र का होरी का ऑडियो- ‘खेलें मशाने में होरी दिगंबर...’ बज रहा था और कुछ बाराती भांग घोंट रहे थे।
कई रथों पर विदेशी युवक-युवतियां शिव-पार्वती के वेश में सज-धज कर सवार हुए। ट्रालियों पर खड्ग लिए काली, कटार लिए दुर्गा, गदाधारी हनुमान तो थे ही राम, लक्ष्मण के वेश में लाग भी निकाले गए। बुलानाला, चौक, बांसफाटक, गोदौलिया से दशाश्वमेध तक रास्ते भर गुलाब, गेंदा के फूलों के साथ जमकर अबीर, गुलाल उड़ाकर माहौल को होलियाना मस्ती में रंग दिया गया। मतदान के प्रति जागरूकता का संदेश एक ट्राली पर सवार नाट्य संस्था के कलाकार अभिनय के जरिए दे रहे थे।