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सरयू का तांडव: ग्रामीण कर रहे रतजगा, चारे और दवा की किल्लत; बच्चों को स्कूल आने-जाने में भी परेशानी

Thu, 01 Oct 2026 06:11 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।

सार

आजमगढ़ के त्रिलोकी का पुरा गांव में सरयू का पानी घुसने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी चढ़ने से आवागमन प्रभावित है। ग्रामीण रातभर रतजगा कर घरों और सामान की निगरानी कर रहे हैं। पशुओं के चारे और दवाओं की किल्लत है। बच्चों को स्कूल आने-जाने में भी परेशानी हो रही है।
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सरयू नदी के बाढ़ से परेशानी। - फोटो : संवाद
सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के गांवों में अब पानी घुसने लगा है। 12 घरों वाले त्रिलोकी का पुरा में बाढ़ का पानी घरों के किनारे तक पहुंच गया है और कुछ घरों में पानी घुसना शुरू हो गया है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। लोग रात में जागकर घर और सामान की निगरानी कर रहे हैं।
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सरयू नदी का जलस्तर।  - फोटो : संवाद
महुला-गढ़वल बांध के दक्षिण चक्की, देवारा खास राजा, बांका, बुढ़नपट्टी, साहडीह, अजगरा, मगरवी, सोनौरा, अचल नगर, इस्माइलपुर, अराजी नवरार किता प्रथम व द्वितीय, रोशनगंज और उरदिहा समेत कई गांवों के संपर्क मार्ग प्रभावित हो गए हैं। रास्तों पर बाढ़ का पानी चढ़ने से आवागमन मुश्किल हो गया है। बेलहिया ढाला से अजगरा जाने वाले संपर्क मार्ग पर पानी अधिक होने के कारण लोग आवागमन के दौरान गिरकर चोटिल हो रहे हैं। 
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सरयू नदी का बढ़ रहा जलस्तर।  - फोटो : संवाद
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र के विद्यालय अभी संचालित हो रहे हैं, जिससे बच्चों को इन्हीं जलमग्न रास्तों से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है। बाढ़ बढ़ने के साथ पशुओं के चारे की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। बीमार बच्चों और पशुओं के लिए दवा लेने ग्रामीणों को रौनापार, चांदपट्टी और हरैया तक जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ चौकियों पर न तो दवाएं उपलब्ध हैं और न ही कर्मचारी मौजूद मिल रहे हैं। इससे बाढ़ प्रभावित लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

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सरयू नदी का जलस्तर। - फोटो : संवाद
देवारा में चारा संकट के साथ आवागमन भी मुश्किल
सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। पशुओं के चारे का संकट पहले से बना हुआ है, वहीं अब आवागमन की समस्या भी गंभीर हो गई है। बेलहिया ढाला पर बिलैया संपर्क मार्ग पर बाढ़ का पानी भरने के बावजूद अभी तक नाव नहीं लगाई गई है। ग्रामीणों को मजबूरी में पानी से होकर आवागमन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है और संपर्क मार्गों पर पानी चढ़ने से गांवों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। सबसे अधिक परेशानी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है। जरूरी सामान लेने या इलाज के लिए भी लोगों को पानी पार कर मुख्य मार्ग तक पहुंचना पड़ रहा है। बाढ़ के कारण पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है।
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गांवों में लोग हो रहे परेशान। - फोटो : संवाद
बाढ़ क्षेत्र में तीन स्कूल बंद
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में शिक्षा क्षेत्र हरैया के 21 प्राथमिक और छह जूनियर हाईस्कूल हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालय देवारा खास राजा प्रथम, प्राथमिक विद्यालय देवारा खास राजा द्वितीय और प्राथमिक विद्यालय चक्की हाजीपुर को बंद कर दिया गया है। अन्य विद्यालयों में अभी शिक्षण कार्य चल रहा है। बीईओ पंकज कुमार मौर्य ने बताया कि जो भी विद्यालय बाढ़ से प्रभावित होंगे, उन्हें बंद कर दिया जाएगा। जिन विद्यालयों तक बच्चों और शिक्षकों के आवागमन में परेशानी होगी, वहां से सूचना मिलते ही विद्यालय बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।
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कई किसानों के खेत डूबे। - फोटो : संवाद
बदरहुआ पर लाल निशान से 70 सेमी ऊपर पहुंचा जलस्तर
सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बदरहुआ नाले पर मंगलवार शाम चार बजे जलस्तर 72.10 मीटर दर्ज किया गया था, जो बुधवार को 28 सेंटीमीटर बढ़कर 72.38 मीटर हो गया। वहीं डिघिया नाले पर भी जलस्तर में 22 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। मंगलवार को यहां जलस्तर 71.35 मीटर था, जो बुधवार को बढ़कर 71.57 मीटर पहुंच गया। बदरहुआ नाले का खतरा बिंदु 71.68 मीटर है। बुधवार को यहां जलस्तर खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। यहां न्यूनतम जलस्तर 70.25 मीटर और अधिकतम 73.52 मीटर दर्ज किया गया है। इसी तरह डिघिया नाले का खतरा बिंदु 70.40 मीटर है। बुधवार को जलस्तर खतरे के निशान से 1.17 मीटर ऊपर रहा। डिघिया में न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर और अधिकतम 72.59 मीटर है।
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सरयू नदी में स्नान करते हुए ग्रामीण। - फोटो : संवाद
बाढ़ क्षेत्र का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। प्रशासन की ओर से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। जहां नाव की जरूरत है, वहां नाव लगा दी गई है। किसी प्रकार की समस्या नहीं है। नौ गांवों में 18 नावों का संचालन किया जा रहा है। इनमें मानिकपुर, देवरा इस्माइलपुर, सोनौरा, उर्दिहा, भदौरा मकरंद, चक्की, अराजी मलहूपुरवा, हैदराबाद और नवरार देवारा जदीद किता प्रथम शामिल हैं। जलस्तर और बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। - संजीव कुमार राय, एसडीएम सगड़ी।
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