फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संपूर्णानंद संस्कृत विवि दीक्षांत समारोह: संस्कृत में दोष आने से राष्ट्र पर आएगा संकट- राज्यपाल

Fri, 06 Dec 2019 12:07 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
1 of 15
संपूर्णा नंद संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह का दीप जलाकर उदघाटन करतीं प्रदेश की राज्यपाल आनंदी, साथ में विश्वविद्यालय अनुदाय आयोग के आचार्य भूषण पटवर्धनशश, कुलपति राजाराम शास्त्री। - फोटो : अमर उजाला।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का मुख्य भवन गुरुवार को 37वें दीक्षांत समारोह का साक्षी बना। ऐतिहासिक मुख्य भवन में मेधावियों को जब गोल्ड मेडल मिले तो सुनहरी आभा से उनके चेहरे दमक उठे। आचार्य परीक्षा में बेहतरीन अंक प्राप्त करने वाले 33 छात्रों को 59 पदक प्रदान किए गए। हालांकि, इस दौरान 26 मेधावी ही उपस्थित रहे। कुलाधिपति और प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और यूजीसी के उपाध्यक्ष प्रो. भूषण पटवर्धन के हाथों स्वर्ण पदक पाने के बाद उत्साहित विद्यार्थियों ने संस्कृत और समाज की सेवा के प्रति संकल्प को दोहराया। डीलिट की उपाधि पद्मश्री चमू कृष्ण शास्त्री को दी गई। वहीं, संत स्वामी शरणानंद महामहोपाध्याय की उपाधि लेने नहीं पहुंचे।
विज्ञापन

2 of 15
कुलाधिपति और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि आज की शिक्षा सिर्फ प्रमाण पत्र जुटाने वाली बन गई है। यह दोष संस्कृत की शिक्षा में नहीं आना चाहिए। संस्कृत में अगर यह दोष आ गया तो राष्ट्र संकट में पड़ सकता है। इसके लिए संस्कृत के विद्वानों और छात्रों को सतर्क रहना होगा। डॉ. संपूर्णानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत की। कुलाधिपति ने कहा कि संस्कृत भाषा का नहीं संपूर्ण भारतीय संस्कृति का अध्ययन है। संस्कृत वसुधैव कुटुंबकम् के साथ संपूर्ण विश्व को एकता के सूत्र में बांधती है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक संस्कृत ने भारत को एकता के सूत्र में पिरोया है।
विज्ञापन

3 of 15
उन्होंने संस्कृत भाषा की शुद्धता के लिए भाषा के विद्वानों और प्रतिभाशाली छात्रों को दायित्व बोध भी कराया। उन्होंने कहा कि छात्र व विद्वान स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा की अलख जगाने के साथ गरीब बच्चों को पढ़ाएं। संस्कृत भाषा के प्राचीन महत्व का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं के कारण इस देव भाषा की बड़ी उपेक्षा हुई। स्वतंत्रता के बाद भी इसे महत्व नहीं दिया गया, लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार के प्रयास से भाषा का उत्थान हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की तकदीर और तस्वीर बदल रही है।

4 of 15
युवा ही लिखेंगे नए भारत की नई तकदीर
मेडल के रूप में मिले गोल्ड को असली पूंजी बताते हुए कुलाधिपति ने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि दैनिक जीवन में कुछ समय सामाजिक सरोकारों के लिए भी जरूर निकालें। जब वह इससे जुड़ेंगे तो आत्म संतोष मिलेगा और नए भारत की तस्वीर साकार होगी। नए भारत की तकदीर युवा ही लिखेंगे। महिला सशक्तीकरण, उनके स्वावलंबन पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं के प्रति समाज को नजरिया बदलना चाहिए। आर्थिक, राजनीतिक, कानूनी मुद्दों के साथ उनके प्रति संवेदनशील बनकर कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत है।
विज्ञापन

5 of 15
राज्यपाल ने दिलाए पांच संकल्प :
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री के स्वच्छता और फिट इंडिया अभियान के साथ वर्ष 2025 तक देश को टीवी मुक्त बनाने के अभियान में जन भागीदारी पर जोर दिया। कुलाधिपति ने कहा कि शिक्षा सही मायने में तभी सार्थक होगी, जब छात्र पांच संकल्पों को अपने जीवन में उतारेंगे।
विज्ञापन

6 of 15
  1. दहेज मुक्ति: राज्यपाल ने कहा कि दहेज समाज की सबसे बड़ी बुराई है। हम रोज इसे देखते, सुनते, पढ़ते हैं, लेकिन इसका खात्मा नहीं कर पा रहे। छात्र-छात्राओं को संकल्प लेना होगा कि वह अपने विवाह में दहेज का तिरस्कार करेंगे।
  2. टीबी से मुक्ति : प्रधानमंत्री ने देश को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसकी प्राप्ति के लिए सबका सहयोग जरूरी है। प्रत्येक परिवार एक टीबी मरीज को गोद ले।
विज्ञापन

7 of 15
3. कुपोषण से मुक्ति : बच्चों में कुपोषण की समस्या बढ़ रही है। हर विवि को यह निर्देश दिया गया है कि वह छात्राओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराए। जिनका हीमोग्लोबिन स्तर 13 से कम है, उनके अभिभावकों को बुलाकर जागरूक करें।
4. जल संरक्षण : कॉलेज, यूनिवर्सिटी, गली, मोहल्ला हर स्थान पर जल संरक्षण करें। पानी की बर्बादी नहीं होनी चाहिए। बूंद-बूंद संरक्षण से ही जल संकट से निजात मिलेगी।
5. अन्न की बर्बादी रोकें : शादी-विवाह सहित अन्य समारोहों या घर में थाली में उतना ही भोजन लें, जितना खा सकें। इसे सिर्फ बातों तक रखें, बल्कि अपने, परिवार और समाज के जीवन में भी उतारें।

8 of 15
बच्चों को दीक्षांत में बुलाने का मकसद प्रेरित करना
राज्यपाल ने पाणिनि कन्या महाविद्यालय की जूनियर हाईस्कूल और संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थियों को सम्मानित करने के बाद कहा कि बच्चों को समारोह में बुलाने का मकसद उन्हें प्रेरित करना है। वह जब स्वर्ण पदक लेने वाले छात्रों को देखेंगे तो उनके मन में भी पढ़ाई के प्रति भाव जगेगा। वह मेहनत के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों के होते हैं। उन्हें घूमने-फि रने का मौका कम ही मिलता है। विश्वविद्यालयों को चाहिए कि ऐसे बच्चों को अपने यहां बुलाए। विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी और विभागों में भ्रमण कराएं।

9 of 15
गुरु की कृपा से दूर हुए राह के कांटे
नव्य व्याकरण विषय में पांच स्वर्ण पदक हासिल करने वाले हरिओम शर्मा का कहना है कि संस्कृत की रक्षा और संवर्धन के लिए हम कार्य करेंगे। मध्यप्रदेश से बीएड कर रहे हरिओम पीएचडी के बाद शिक्षण कार्य के माध्यम से संस्कृत की नई पौध तैयार करना चाहते हैं। मूलरूप से मध्यप्रदेश के श्योपुर के रहने वाले हरिओम के पिता भरत लाल शर्मा किसान और माता कलावती शर्मा गृहणी हैं। संस्कृत शिक्षा के सवाल पर उनका कहना था कि गुरु की कृपा से हर काम आसान हो जाता है। मेरे गुरु वाचस्पति डॉ. दिव्य चेतन ब्रह्मचारी के निर्देशन में मेरी शिक्षा के राह के सारे कांटे दूर हो गए।

10 of 15
चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार करती है आश्रम पद्धति
धर्मशास्त्र में तीन मेडल हासिल करने वाले गुजरात के हरेन अस्वार का कहना है कि आश्रम पद्धति की शिक्षा व्यक्ति को जीवन की हर चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार करती है। काशी आकर शिक्षा ग्रहण करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। गुरु और शिष्य की भारतीय प्राचीन परंपरा स्वयं में अद्वितीय है। आश्रम के नियम, संयम, सेवाभाव छात्र जीवन को और परिष्कृत करती हैं। हरेन धर्मशास्त्र के माध्यम से ही संस्कृत की सेवा करना चाहते हैं। बतौर धर्मगुरु या शिक्षक बनकर वह समाज में संस्कृत का प्रचार प्रसार करेंगे।

11 of 15
पीढ़ियों से चली आ रही थाती को संभाल रहे प्रकाश
गाजीपुर के रहने वाले प्रकाश पांडेय को सामवेद में तीन स्वर्ण पदक हासिल हुए हैं। पीढि़यों से चली आ रही संस्कृत की थाती को संभालने के लिए उन्होंने संस्कृत के अध्ययन की ओर कदम बढ़ाया है। दादा और परदादा संस्कृत के विद्वान थे। दादा जी की इच्छा थी कि उनका पोता संस्कृत का विद्वान हो इसलिए मैंने इसको चुना। संस्कृत से मेरा बचपन से ही लगाव था। पिता जी सरकारी होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. घनश्याम पांडेय और माता गायत्री पांडेय गृहणी हैं। प्रकाश का कहना है कि संस्कृत का भविष्य उज्जवल है और हम लोग भी इसको बेहतर करने के लिए लगातार प्रयास करेंगे।

12 of 15
पति और परिवार का प्रेम बना हर कदम पर संबल
दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक हासिल करने में आधी आबादी की संख्या भले ही कम हो लेकिन संस्कृत की सेवा का जो जज्बा उनके मन में है वह काबिले तारीफ है। मिर्जापुर की पुष्पा केशरवानी को सांख्य योग में गोल्ड मेडल दिया गया। वह भविष्य में बतौर शिक्षक संस्कृत की सेवा करना चाहती हैं। पति डॉ. विनोद कुमार गुप्ता का हर कदम पर उनको साथ मिला।

13 of 15
पहडि़या की रहने वाली श्रद्धा पांडेय को नव्य व्याकरण में गोल्ड मिला है। उनके पिता डॉ. रमाकांत पांडेय संस्कृत के अध्यापक हैं। वह भविष्य में शिक्षिका बनना चाहती हैं।

14 of 15
सिक्किम की रहने वाली टीका देवी को दर्शनशास्त्र में गोल्ड मिला है। वह अपने एक साल के बेटे के साथ गोल्ड मेडल लेने पहुंची थी। उन्होंने बताया कि शिक्षा में उनके पति डॉ. केशव पोखरियाल का बहुत योगदान है।
विज्ञापन

15 of 15
प्राकृत एवं जैन आगम में स्वर्ण पदक हासिल करने वाली लखनऊ की पत्रिका जैन पोस्ट डाक्टोरल फेलोशिप कर रही हैं। संस्कृत के संवर्धन के लिए प्राकृत एवं जैनागम की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। अध्ययन के दौरान मुश्किलें तो कई सारी आईं लेकिन परिवार का साथ हमेशा संबल प्रदान करने वाला रहा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें