गणतंत्र दिवस
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बूढ़ी आंखों से पूरा होते देख रहा हूं देश की खुशहाली का सपना
राजातालाब के बभनियाव गांव के 45 साल तक ग्राम प्रधान रहे 93 वर्षीय माया शंकर सिंह कहते हैं कि भारत को अपने जीवन काल में सशक्त होते देख उनके रगों में फिर से जवानी का खून दौड़ने लगता है। देश खुशहाल होने का जो सपना आंखों में सजाया था वह बूढ़ी आंखों से पूरा होते देख रहा हूं। तब अपने भारत के संविधान और अखंडता को लेकर थोड़ी बहुत चिंता हुआ करती थी पर अब वह चिंता लेस मात्र भी नहीं रह गई है। वर्तमान में भारत की सरकार, नौजवान, किसान, अधिकारी, सैनिक और मजदूर देश के विकास के लिए कटिबद्ध नजर आते हैं। देश के नौनिहालों ने आजादी के पूर्व से लेकर वर्तमान समय तक देश को अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उन्हीं लोगों की देन है कि आज हमें भारत की शक्ति पर गर्व होता है। आने वाली पीढ़ियां इस अनुभूति को बनाए रखें तो वह मरने के बाद भी प्रसन्न रह सकेंगे।