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रंगभरी एकादशी: लक्खा मेले जैसा नजारा...गूंजा हर-हर महादेव, पांच लाख भक्तों ने किया गुलाल से अभिषेक; अलर्ट

Sat, 28 Feb 2026 06:20 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Rangbhari Ekadashi: रंगभरी एकादशी के अवसर पर 45 मिनट में 500 मीटर की यात्रा तय की गई। गौना का आयोजन भक्तों के लिए लक्खा मेले से कम नहीं रहा। एक घर से गुलाब की 51 किलो पंखुड़ियां फेंकी गईं। चार बजे सप्तऋषि आरती हुई। गर्भगृह का अरघा कई बार अबीर-गुलाल से भर गया था।
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रंगभरी एकादशी के अवसर पर महादेव के साथ मां गौरा का गौना। - फोटो : संवाद
Holi: महादेव के साथ मां गौरा का गौना भक्तों के लिए किसी लक्खा मेले से कम नहीं रहा। सप्तऋषि से लेकर शयन आरती तक डमरुओं की गर्जना और शंखनाद के बीच करीब पांच लाख भक्तों ने महादेव-गौरा का गुलाल से अभिषेक कर काशी में होली का श्रीगणेश किया। 
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काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में आयोजन। - फोटो : संवाद
वहीं, रंग भरी एकादशी पर पूरे दिन श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में 5.5 लाख श्रद्धालु पहुंचे। पूर्व महंत के आवास से रजत पालकी पर मां पार्वती को विदा कर निकले बाबा विश्वनाथ पर गली के एक घर से ही 51 किलो गुलाब की पंखुड़ियां छतों से गिराई गईं। 45 मिनट में गौरा अपने ससुराल पहुंच गईं।
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महादेव के साथ मां गौरा का गौना। - फोटो : अमर उजाला
धाम में सिर्फ छह घंटे, सप्तऋषि आरती (परिवर्तित समय शाम 4 बजे) से लेकर शयन आरती तक पांच लाख भक्तों ने रंग भरी एकादशी खेली। इसमें रात आठ बजे तक ज्यादातर दूर वाले श्रद्धालुओं ने रंग उड़ाया तो उसके बाद से लेकर शयन आरती तक काशीवासियों ने बाबा के गर्भगृह और अरघे को रंगों से भरकर गाढ़ा लाल कर दिया। 

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ड्रोन शाॅट से काशी विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : मंदिर प्रशासन
ज्योतिर्लिंग तो नहीं दिखा मगर लोगों ने चल प्रतिमा के झांकी दर्शन किए। गर्भगृह के बाहर अबीर गुलाल ऐसा उड़ाया कि धाम के सफेद पत्थर रेड कारपेट में बदल गए। भक्त रंग में घुलते मिलते ही दंडवत प्रणाम करते रहे। शयन आरती के बाद चल प्रतिमा को वापस पूर्व महंत के आवास ले जाया गया।
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डमरूओं की थाप से गूंजी गलियां। - फोटो : अमर उजाला
45 मिनट में 500 मीटर की यात्रा
धाम से लेकर पूर्व महंत कुलपति तिवारी के टेढ़ीनीम स्थित आवास तक गलियों में अबीर-गुलाल की लाल चादर बिछ गई। यहां पर शाम 4.45 बजे मां गौरा का गौना कराकर निकले बाबा विश्वनाथ नगर भ्रमण करते हुए अपने धाम में आए। 500 मीटर की यात्रा 45 मिनट में पूरी हुई। 
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बाबा का हुआ विहंगम शृंगार। - फोटो : मंदिर प्रशासन
बाबा और गौरा की रजत पालकी आगे-आगे और पीछे-पीछे 20 से 25 हजार श्रद्धालु अबीर-गुलाल बाबा पर उड़ाते हुए मंदिर कॉरिडाेर तक पहुंचे। विश्वनाथ धाम के पास ड्रोन कैमरों ने नवदंपती की तस्वीरें उतारीं। मंदिर में पहले से मौजूद 5000 से ज्यादा भक्तों ने शिव-पार्वती का स्वागत किया।
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खिड़की से आयोजन को निहारतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
महारानी का मुकुट पहनकर गौरा चलीं सुसराल
बाबा विश्वनाथ राजशाही पगड़ी और माता पार्वती महारानी का मुकुट पहनकर राजसी ठाट से अपने ससुराल के लिए निकलीं। इससे पहले बाबा की प्राचीन पालकी की विशेष पूजा महंत परिवार के प्रतिनिधि पं. वाचस्पति तिवारी ने की। भक्तों ने पूरे दिन अबीर-गुलाल अर्पित कर बाबा विश्वनाथ और गौरा का आशीर्वाद लिया। यहीं पर 20 हजार से ज्यादा भक्तों ने दर्शन किए। डमरुओं की गर्जना के बीच बाबा विश्वनाथ माता गौरा और गणेश के साथ पालकी पर सवार हुए। महंत आवास से मंदिर तक गलियों में गुलाल और पंखुड़ियों की चादर बिछ गई।
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रंगभरी एकादशी। - फोटो : मंदिर प्रशासन
साक्षी विनायक के पास 51 किलो गुलाब बरसा
शाम 5:09 मिनट पर जैसे ही अर्चकों का दल महंत आवास की गली में पहुंचा, हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा इलाका गूंज पड़ा। पालकी उठते ही चारों ओर से अबीर और गुलाब की पंखुड़ियों की बौछारें हो गईं। पालकी जब नौ ग्रहेश्वर महादेव मंदिर से आगे बढ़ी तो विष्णु कसेरा के आवास से 51 किलो गुलाब की पंखुड़ियां बाबा पर बरसाईं गईं। साक्षी विनायक तक पहुंचते-पहुंचते भक्तों के सफेद कपड़े भी लाल हो गए। बाबा और माता पार्वती की चल प्रतिमाएं महंत आवास से निकलकर साक्षी विनायक और ढुंढीराज विनायक होते हुए विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचीं।

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