महादेव के साथ मां गौरा का गौना।
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धाम में सिर्फ छह घंटे, सप्तऋषि आरती (परिवर्तित समय शाम 4 बजे) से लेकर शयन आरती तक पांच लाख भक्तों ने रंग भरी एकादशी खेली। इसमें रात आठ बजे तक ज्यादातर दूर वाले श्रद्धालुओं ने रंग उड़ाया तो उसके बाद से लेकर शयन आरती तक काशीवासियों ने बाबा के गर्भगृह और अरघे को रंगों से भरकर गाढ़ा लाल कर दिया।