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रामनगर की रामलीला: तिमि जनक रामहि सिय समरपी बिस्व कल कीरति नई...श्रीराम समेत चारों भाई विवाह बंधन में बंधे

Sat, 13 Sep 2025 06:12 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला का मंचन देखने के लिए लीला प्रेमी जुटे रहे। विवाह का मंचन होने ही जय सियाराम...के जयकारे लगने लगे। चारों भाई जब दूल्हा बने तो लोगों ने इसकी सेल्फी ली।
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रामनगर की रामलीला का मंचन। - फोटो : अमर उजाला
हिमवंत जिमि गिरिजा महेसहि हरिहि श्री सागर दई। तिमि जनक रामहि सिय समरपी बिस्व कल कीरति नई...। यानी जैसे हिमवान ने शिवजी को पार्वतीजी और सागर ने भगवान विष्णु को लक्ष्मीजी दी थीं, वैसे ही जनकजी ने श्री रामचंद्रजी को सीताजी समर्पित किया। इससे विश्व में सुंदर नवीन कीर्ति छा गई।
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डोली में बैठे कलाकार। - फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को रामनगर सियाराममय हो गया, जब प्रभु श्रीराम व सीता विवाह बंधन में बंधे। प्रभु के विवाह के साक्षी बन लीलाप्रेमी निहाल हो उठे। रामलीला के सातवें दिन की लीला में अयोध्या से बरात प्रस्थान और जनकपुर में मंत्रोच्चार व पूर्ण विधि विधान के साथ श्रीराम जानकी विवाह संपन्न हुआ। धूमधाम से भगवान राम की बरात निकलती है। एक रथ पर गुरु वशिष्ठ, दूसरे रथ पर राजा दशरथ अपने मंत्री सुमंत के साथ जाते हैं। भरत व शत्रुघ्न घोड़े पर सवार होकर जाते हैं।
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रामलीला में उपस्थित नेमी। - फोटो : अमर उजाला
चारों भाई दूल्हा बनते हैं। भगवान शंकर बैल पर बैठकर माता पार्वती के साथ बरात में आते हैं। लक्ष्मणजी की शादी उर्मिला से, भरतजी की शादी मांडवी से और शत्रुघ्नजी की शादी श्रुतकीर्ति से एक ही मंडप में पूरे विधि विधान से होती है। अयोध्या नरेश राजा दशरथ व राजा जनक चारों जोड़ों को आशीर्वाद देते हैं। स्वर्गलोक से सभी भगवान पुष्पवर्षा करते हैं। इसके बाद लीला की आरती संपन्न होती है।

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रामनगर में लीला प्रेमियों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला
जाल्हूपुर रामलीला में गूंजे जयकारे, संपन्न हुआ राम-सीता विवाह
जाल्हूपुर की प्राचीन रामलीला में शुक्रवार को राम-सीता विवाह का मंचन किया गया। सैकड़ों की संख्या में मौजूद क्षेत्रीय महिलाओं ने विवाह व मंगल गीत गाए तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों से गूंज उठा। सहेलियों ने दूल्हा-दुल्हन को कोहबर में ले जाकर आरती उतारी और देवताओं की जय-जयकार के बीच लीला का समापन हुआ। 
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रामनगर की रामलीला। - फोटो : रोहित सोनकर
शिवपुर में धनुष यज्ञ और लक्ष्मण-परशुराम संवाद देख दर्शक हुए भाव विभोर
शिवपुर की रामलीला के सातवें दिन लीला में धनुष यज्ञ और लक्ष्मण परशुराम संवाद की लीला हुई। कोई भी राजा शिव जी के धनुष को उठाना तो दूर हिला तक न सका। पुत्री का विवाह होता न देख निराश हो जनक कहते हैं कि अब जनि कोऊ माखै भट मानी, वीर विहीन मही मैं जानी..। उनके शब्दों को सुन लक्ष्मण उत्तेजित हो जाते हैं। विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम धनुष भंग करते हैं। भगवान परशुराम के आगमन और संवाद के साथ लीला का समापन होता है। यह जानकारी रामलीला समिति के मंत्री संतोष मिश्रा ने दी।
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