फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रामनगर की रामलीला: भोर की आरती व काले हनुमानजी के दर्शन को उमड़ा जन सैलाब, देखें तस्वीरें

Tue, 23 Oct 2018 09:55 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
विज्ञापन
1 of 6
varanasi - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के रामनगर की विश्वप्रसिद्ध श्रीराम लीला के अंतिम दिन मंगलवार को श्रीराम का उपवन विहार, सनकादिक-मिलन, पुरजनोपदेश आदि की लीला संपन्न हुई। इससे पहले विश्वप्रसिद्ध भोर की आरती देखने के लिए एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु मंगलवार अल सुबह रामनगर में एकत्रित हुए। पूरा अयोध्या मैदान लीला प्रेमियों से खचाखच भरा था। इससे इतर रामनगर दुर्ग में स्थित दक्षिणमुखी काले हनुमान जी के मंदिर में दर्शन के लिए मंगलवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है।  आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...

 
विज्ञापन

2 of 6
varanasi - फोटो : अमर उजाला

विश्वप्रसिद्ध भोर की आरती देखने के लिए एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु मंगलवार अल सुबह रामनगर में एकत्रित हुए। पूरा अयोध्या मैदान लीला प्रेमियों से खचाखच भरा था।  चौदह वर्ष के वनवास से लौटे श्री राम के राज्याभिषेक की लीला सोमवार शाम को की गई। पूरी रात प्रभु राजसिंहासन पर विराजे। जानकी जी और तीनों भाई भी साथ के आसनों पर सुशोभित रहे। लीला प्रेमियों ने रातभर जागकर उनके दर्शन किए। जैसे-जैसे रात ढलती गई, श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। 

 
विज्ञापन

3 of 6
varanasi - फोटो : अमर उजाला
भोर में पांच बजे अयोध्या मैदान पूरी तरह श्रद्धालुओं से पट गया। काशी राज परिवार के अनंत नारायण सिंह दुर्ग से पैदल चलकर अयोध्या मैदान में आरती लेने पहुंचे तो लीला प्रेमियों ने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया। दस मिनट तक चली आरती के लिए श्रद्धालुओं ने रातभर जागकर इंतजार किया। आरती के बाद पांचों स्वरूपों श्री राम, सीताजी, भरतजी, लक्ष्मणजी और शत्रुघ्नजी को सेवक अपने कंधों पर पैठकर गंगा दर्शन कराने के बाद बलुआ घाट स्थित धर्मशाला में वापस ले गए। 

 

4 of 6
varanasi - फोटो : अमर उजाला
रामनगर दुर्ग में स्थित दक्षिणमुखी काले हनुमान जी के मंदिर में दर्शन के लिए मंगलवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। हनुमानजी का दर्शन करने के लिए खड़े भक्त जयकारे लगाते रहे। श्रद्धालुओं का मानना है कि दुर्ग में काले हनुमान जी का दर्शन करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है। भोर की आरती होने के बाद वर्ष में मात्र एक दिन खुलने वाले दुर्ग में दक्षिण छोर पर स्थित दक्षिणमुखी श्यामवर्ण हनुमान के दर्शन के लिए मंगलवार सुबह छह बजे से ही लीला प्रेमियों सहित श्रद्धालुओं की लाइन लग गई।

 
विज्ञापन

5 of 6
varanasi - फोटो : अमर उजाला
मान्यता है कि दक्षिणमुखी काले हनुमान जी का संबंध त्रेतायुग में श्रीराम-रावण युद्धकाल से है। तब रामेश्वरम् में लंका जाने के लिये जब भगवान राम समुद्र से रास्ता मांग रहे थे उस समय समुद्र ने पहले तो उन्हें रास्ता नहीं दिया। इसपर कुपित होकर श्रीराम ने बाण से समुद्र को सुखा देने की चेतावनी दी। इसपर भयभीत होकर प्रकट हुए समुद्र द्वारा श्रीराम से माफी मांगी गई और अनुनय-विनय किया गया।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
varanasi - फोटो : अमर उजाला

इसके बाद श्रीराम ने प्रत्यंचा पर चढ़ चुके उस बाण को पश्चिम दिशा की ओर छोड़ दिया। इसी समय बाण के तेज से धरती वासियों पर कोई आफत ना आए इसके लिये हनुमानजी घुटने के बल बैठ गये, जिससे धरती को डोलने से रोका जा सके। वहीं श्रीराम के बाण के तेज के कारण हनुमानजी का पूरा देह झुलस गया, जिसके कारण उनका रंग काला पड़ गया।ये मूर्ति रामनगर किले में जमीन के अंदर कैसे आयी, ये किसी को नहीं पता। बाद में जब रामनगर की रामलीला शुरू हुई तो भोर की आरती के दिन मंदिर को आम जनमानस के लिए खोला जाने लगा। ये परंपरा सैकड़ों साल बाद आज भी जारी है।

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें