रक्षाबंधन न केवल भाई बहन के स्नेह का पर्व है बल्कि ये गंगा जमुनी तहजीब को भी रेशमी धागों से बुनता है। भाई की कलाई पर सजने वाली वाले रक्षा सूत्र के धागे भले ही कच्चे हों लेकिन उनके प्यार की डोर बेहद मजबूत होती है। ऐसा त्योहार जो धर्म और मजहब की बंदिशों से परे है और नि:स्वार्थ प्रेम की परिभाषा है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें....
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- फोटो : amar ujala
काशी वैसे भी मजहबी सद्भाव की मिट्टी है। रविवार को रक्षाबंधन के मौके पर कई हिंदू-मुस्लिम बहनों ने दूसरे धर्म के भाइयों को राखी बांधकर इसी रिवायत को आगे बढ़ाया। कलाई पर सजी राखी अगर भाई बहन के प्रेम का प्रतिनिधित्व करती है तो उसका बंधन हिंदु मुस्लिम एकता को दिखाता है।
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बीएचयू के शोध छात्र आकिब अली को तान्या जायसवाल बीते 11 साल से राखी बांध रही हैं। तान्या अभी बीएससी सेकंड ईयर में हैं। 11 साल पहले आकिब की इकलौती बड़ी बहन का इंतकाल के बाद जब आकिब पूरी तरह से टूट गए थे, तब तान्या ने उन्हें अपना बड़ा भाई माना। आकिब भी पूरे दिल से तान्या को बहन मानते हैं। तान्या की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी उठाते हैं। उनकी बदौलत उनका परिवार भी आज एक परिवार के सूत्र में बंध गया है। तान्या व आकिब दोनों ही मूल रूप से चंदौली नौबतपुर के रहने वाले हैं।
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काशी की मुस्लिम बहनों ने विशाल भारत संस्थान के संस्थापक डॉ. राजीव श्रीवास्तव की कलाई पर राखी सजाकर विश्वास और सद्भावना की डोर को और मजबूत किया। सकीना, परवीन, आमिना और सानिया डॉ. राजीव को अपने सगे भाई से बढ़कर मानते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधी तो मुस्लिम धर्मगुरु अफसर बाबा को अर्चना भारतवंशी ने राखी बांध भाई बहन का रिश्ता गांठा।
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इसी तरह मो. अजहरुद्दीन और डॉ. गुफरान जावेद को खुशी, इली, उजाला ने राखी बांधकर सद्भावना का संदेश दिया। यहां नजमा परवीन, नाजनीन अंसारी, डॉ. मृदुला जायसवाल, दीपाली रमन, शालिनी पांडेय मौजूद रहीं।
काशी वैसे भी मजहबी सद्भाव की मिट्टी है। रविवार को रक्षाबंधन के मौके पर कई हिंदू-मुस्लिम बहनों ने दूसरे धर्म के भाइयों को राखी बांधकर इसी रिवायत को आगे बढ़ाया। कलाई पर सजी राखी अगर भाई बहन के प्रेम का प्रतिनिधित्व करती है तो उसका बंधन हिंदु मुस्लिम एकता को दिखाता है।