यूपी चुनाव में रिकार्डतोड़ प्रदर्शन के बाद भाजपा में सीएम पद के उम्मीदवारों की कई दिनों तक अटकलें चलती रहीं। इस रेस में पहले सूबे के सबसे कद्दावर भाजपा नेता राजनाथ सिंह आगे बताए जा रहे थे लेकिन अंततः बाजी गोरखपुर से भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ के हाथ लगी। ये हैं वो पांच कारण जो राजनाथ सिंह की दावेदारी के खिलाफ गए -
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राजनाथ सिंह
फाइनेंसियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक राजनाथ सिंह की छवि अभी भी एक चालाक राजनेता की है। वर्ष 2004 में हार के बाद राजनाथ सिंह पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए हिंदुत्व के एजेंडे पर आगे बढ़े। इसी वजह से अगले 10 साल में भाजपा और पीएम मोदी का यूपी में उभार हुआ। पत्र के मुताबिक यूपी को अब एक ऐसे राजनेता की जरुरत है जो अपनी राजनीति की वजह से नहीं बल्कि अपने काम की वजह से ज्यादा जाना जाए। एक ऐसा व्यक्ति जो यूपी के विकास की गारंटी दे सके। इस रोल में मनोज सिन्हा फिट बैठते हैं।
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राजनाथ सिंह
दूसरा प्रमुख कारण है कि पीएम मोदी और अमित शाह ऐसे भाजपा नेताओं को आगे बढ़ा रहे हैं जो लो प्रोफाइल रहकर काम को प्राथमिकता देते हैं। भाजपा ने यही प्रयोग महाराष्ट्र, हरियाणा और असम में किया। इन राज्यों में ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी गई जो लो प्रोफाइल रहते हैं और जमकर काम करते हैं। इस दृष्टि से भी मनोज सिन्हा मुफीद बैठ रहे हैं। वहीं राजनाथ सिंह इसमें फिट नहीं हैं।
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राजनाथ सिंह
- फोटो : self
पीएम मोदी सीईओ जैसे नेताओं को पसंद करते हैं जो निर्धारित समय के अंदर टारगेट पूरा कर देते हैं। प्रधानमंत्री भाजपा में ऐसे अधिक से अधिक नेताओं को चाहते हैं जो कंपनियों के सीईओ की तरह देश और राज्य को चलाएं और काम को समय पर पूरा करने को आदत बनाएं। इस दिशा में मोदी सरकार के कुछ ही मंत्री सफल हुए हैं। यूपी में भी मोदी को एक सीईओ नेता की जरुरत है ताकि वर्ष 2019 के महासमर को जीता जा सके। मनोज सिन्हा सिविल इंजीनियर हैं और आधारभूत ढांचे को मजबूत कर पीएम मोदी के सपनों को पूरा कर सकते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
पीएम मोदी अकेले देश को नहीं चला सकते हैं। उन्हें कुछ ईमानदार और विश्वसनीय साथियों की जरुरत है जो उन्हें सही सलाह दे सकें। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के गोवा वापस चले जाने के बाद पीएम मोदी अब राजनाथ सिंह को यूपी भेजने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं। यहां एक और खास बात यह भी है कि राजनाथ सिंह ने हमेशा से ही पीएम मोदी का समर्थन किया है। इसलिए मोदी अपने विश्वसनीय साथी को कैबिनेट से हटाना नहीं चाहेंगे।
कई विशेषज्ञों का मानना था कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के मुख्यमंत्री के लिए वही व्यक्ति उपयुक्त है जो जातिगत खांचे में सही उतरे। लेकिन यूपी में ऐतिहासिक जीत के बाद सीएम पद के लिए जाति का मुद्दा अब प्रासंगिक नहीं रह गया है। अब केवल विकास ही एकमात्र मुद्दा बचा है। भाजपा ने इस जीत के साथ ही जाति और धर्म के आधार पर वोट देने के मिथक को तोड़ दिया है।