राजेश शुक्ला ने बताया कि जल संरक्षण के लिए गंगा किनारे के 5 राज्यों के सैकड़ों नगरों और उद्योगों को भी एक साथ जुटना होगा। वैज्ञानिक, भूगर्भशास्त्री, सलाहकार, नीति निर्माता, पर्यावरणविद्, गैर सरकारी संगठन, विशेषज्ञ, धार्मिक प्रमुख, साधु संत, गंगा के किनारे आजीविका चलाने वाले मछली पालक, नाविक, किसान के योगदान से ही प्रदूषण मुक्त अविरल गंगा का सपना साकार होगा।