आलीशान इमारतें, भव्य दीर्घाएं और उनमें संरक्षित अनमोल नायाब कृतियां...। ये संग्रहालय ही हैं जो हमारे इतिहास, पुरातत्व और संस्कृति के परिचायक हैं। इन संग्रहालयों में हमारा इतिहास, पुरातत्व और संस्कृति संग्रहीत है। कहीं न कहीं ये हमारी संस्कृति का प्रतिबिंब हैं। जब बात काशी की हो तो भला संग्रहालयों को कौन भूल सकता है। सारनाथ से लेकर रामनगर और भारत कला भवन से लेकर हाल ही में बना पंडित दीन दयाल हस्तकला संकुल, ये संग्रहालय काशी की शान है। आज संग्रहालय दिवस पर हम काशी के संग्रहालयों की बात करते हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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भारत कला भवन
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bharat kala bhawan
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर स्थित भारत कला भवन में देश में प्रचलित लगभग समस्त शैलियों के चित्रों का विशाल संग्रह है। यहां का चित्र संग्रह विश्व में अपना एक विशिष्ट स्थान रखता है। पद्मविभूषण स्वर्गीय राय कृष्णदास ने इसकी स्थापना की थी। यहां 12,000 विभिन्न शैलियों के चित्र से साथ कई अनमोल कृतियां भी हैं। इसमें पुरातत्व, टेराकोटा, निधि, पुरातत्व, धातु की कलाकृतियों के साथ ही एलिस बोनर, एमके गुप्ता के कृतियां शामिल हैं।
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रामनगर संग्रहालय
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ramnagar
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खूबसूरत नक्काशी, भव्य मंडप और खुले आंगन का भव्य रामनगर किला। इसके बीच यहां का संग्रहालय जो बनारस की रियासत की शान है। इस संग्रहालय में कई प्राचीन वस्तुओं का नायाब संग्रह है जिसमें प्राचीन घडि़यां, पुराने शस्त्रागार, तलवारें, पुरानी बंदूकें, शाही कारें और हाथी दांत के सामान शामिल हैं। पर्यटक यहां आकर शाही परिवारों के मध्य युगीन वेशभूषा, आभूषण और फर्नीचर देख सकते हैं।
सारनाथ संग्रहालय
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sarnath museum
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यह संग्रहालय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का प्राचीनतम स्थल है। संग्रहालय में रखी पुरातत्व वस्तुएं तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से बारहवीं शताब्दी ईसवी की हैं। शाक्य सिंह दीर्घा सर्वाधिक मूल्यवान संग्रहों को प्रदर्शित करती है, जिसमें मौर्य काल का सिंह स्तंभ शीर्ष मौजूद है। विभिन्न मुद्राओं में बुद्ध और तारा की मूर्तियों के अलावा बोधिसत्व की खड़ी मुद्रा वाली अभिलिखित विशालकाय मूर्ति है।
हाल ही में बने इस संग्रहालय में न सिर्फ पुरातात्विक वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं बल्कि ये पूर्वी उत्तर प्रदेश की हस्तकला को भी नई पहचान दे रहा है। काशी सहित पूर्वांचल के शिल्प और बुनकरी की पहचान को सशक्त करने और स्थानीय हुनर की चमक दुनिया के कोने कोने में ये संकुल पहुंचा रहा है। इस संग्रहालय में काष्ठ कला, सॉफ्ट स्टोन, गुलाबी मीनाकारी, ब्लैक पॉटरी, जरदोजी आदि शिल्प का सजीव प्रदर्शन देखा जा सकता है। संकुल के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव का कहना है कि हमें अपनी धरोहर को जानना चाहिए। संग्रहालयों से देश के इतिहास, संस्कृति और समाज के बारे में वृहद जानकारी मिलती है।