अतीत के गौरव पर पड़ी धूल और गंदगी को झाड़कर गुप्त कालीन स्थापत्य कला को आम जनता के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व विभाग सारनाथ खंडहर परिसर में बेतरतीब पड़े स्थापत्य कला के अनमोल टुकड़ों को पर्यटकों के लिए सहेजने की तैयारी कर रहा है। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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खंडहर परिसर में ही अद्भुत कला शिल्प से अलंकृत 350 पत्थरों को एक प्लेटफार्म पर पर्यटकों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। सारनाथ खंडहर परिसर में घूमने आने वाले पर्यटकों को गुप्त और गढ़वाल कालीन स्थापत्य कला से रूबरू कराने के लिए पुरातत्व विभाग ने प्रयास शुरू कर दिया है।
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सारनाथ के खंडहर परिसर के पश्चिम उत्तर कोने में 350 की संख्या में बेतरतीब ढंग से रखे अलंकृत गुप्त कालीन स्थापत्य कला के अवशेष पड़े थे। इन पर धूल की परत और घास जम गई थी। पुरातत्वविद के अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान इसको संज्ञान में लिया था।
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इस दौरान उन्होंने मातहतों को निर्देशित किया था कि उक्त अवशेषों की साफ-सफाई के साथ सही ढंग से प्रदर्शित किया जाए। इसके लिए एक आर्कियोलॉजिस्ट को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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इन दिनों गुप्तकालीन अलंकृत पत्थरों की साफ-सफाई के साथ-साथ नंबरिंग एवं कोडिंग की जा रही है। पत्थरों को 25 गुणे 60 फीट लंबे प्लेटफार्म पर प्रदर्शित किया जाएगा।
अधीक्षण पुरातत्वविद नीरज सिन्हा ने कहा कि खंडहर परिसर में अलंकृत युक्त पत्थरों की संख्या लगभग साढ़े तीन सौ है। ये गुप्तकाल से लेकर गढ़वाल काल तक की स्थापत्य कला के बेहतरीन नमूने हैं। इनको पर्यटकों के लिए प्रदर्शित करने की तैयारी की जा रही है।