पूर्वांचल में खौफ का पर्याय रहे प्रेमप्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में सोमवार को गोली मार कर हत्या कर दी गई। उस पर दर्जनों मुकदमे हत्या, लूट के दर्ज थे। मुन्ना बजरंगी जब कोई वारदात अंजाम देता था तो यूपी के इस जिले को सबसे सुरक्षित मानता था और वहां शरण लेता था। वह आराम से यहां महीनों छिपा रहता था। आगे की स्लाइड्स में देखें...
विज्ञापन
2 of 6
Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
मुन्ना बजरंगी वाराणसी निवासी एक माफिया की बस का कंडक्टर हुआ करता था। यहां आने जाने से उसका संबंध कुछ अन्य माफिया से हो गया था और जरायम की दुनिया में आने के बाद वह उन्हीं लोगों के साथ रहने लगा था। 1990 में उसका रिश्ता मिर्जापुर से जुड़ा। जिले के कुछ बदमाशों और नामी गिरामी लोगों से संबंध होने के बाद उसका इनके यहां आना-जाना शुरू हो गया।
विज्ञापन
3 of 6
Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
बजरंगी के लिए मिर्जापुर जिला सुरक्षित शरण स्थली बन गया। वारदात अंजाम देने के बाद वह मिर्जापुर में शरण लेता था लेकिन पुलिस का ध्यान कभी इस ओर नहीं गया। मुन्ना अक्सर जिले के नगरीय इलाके में एक कालोनी में रहने वाले एक व्यक्ति के यहां आता था। इसके अलावा कछवां तथा लालगंज इलाके में अक्सर आता था। शादी हो या अन्य कार्यक्रम, वह अपने विश्वासपात्र शूटर के साथ यहां आया करता था।
4 of 6
Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
लोगों का कहना है कि मुन्ना बजरंगी साधारण व्यक्ति की तरह आता जाता था। इस कारण लोग उसे पहचान नहीं पाते थे। किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के बाद वह मिर्जापुर में शरण लेता था। कटरा कोतवाली क्षेत्र के दुर्गा बाजार निवासी बदमाश बऊ यादव की हत्या नौ वर्ष पूर्व हुई थी। इसका आरोप मुन्ना बजरंगी गिरोह पर लगा था।
विज्ञापन
5 of 6
munna bajrangi
मुन्ना बजरंगी जिले के लालगंज और हलिया के ड्रमंडगंज में काले हिरन व जंगली सुअरों का शिकार करने आया करता था। उसके साथ जिले के कुछ बदमाश भी रहते थे। बजरंगी का फोटो सार्वजनिक नहीं होने के कारण कोई उसे पहचान नहीं पाता था। उसके बारे में केवल उसके साथ रहने वाले कुछ लोग ही जानते थे। बाकी लोग उसे बड़े भाई या दादा कहकर बुलाते थे।
मुन्ना बजरंगी सुल्तानपुर जेल से स्थानांतरित होकर 2013 में जिला कारागार आया था और दो महीने तक यहां बंद रहा। इस दौरान जेल में मोबाइल समेत अन्य प्रतिबंधित सामान बरामद हुआ था। इसके बाद जेल अधीक्षक ने मुन्ना बजरंगी समेत अन्य बड़े अपराधियों को दूसरे जेल में भेजने के लिए शासन को पत्र लिखा था। इसके बाद मुन्ना बजरंगी को सुल्तानपुर जेल भेज दिया गया था।