फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mother's Day: 'मदर इंडिया' से कम नहीं है इन मांओं की कहानी, तीसरी वाली मां के काम से हो जाएंगे भावुक

Sat, 11 May 2019 03:07 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
विज्ञापन
1 of 5
'मां' जितना संक्षिप्त शब्द, उसका सार उतना ही विशाल है। मां ही है जो अपनी औलाद पर कोई मुश्किल आने ही नहीं देती। फिर चाहे मुश्किलों की राह में उसे खुद ही क्यों न चलना पड़े। मातृ दिवस पर हम ऐसी ही माताओं को नमन कर रहे हैं, जिन्होंने खुद अकेले दम पर अपने बच्चों की जिंदगी संवारी। कांटों भरी राह पर खुद चलीं लेकिन बच्चों को इसका एहसास तक नहीं होने दिया। आइए रूबरू कराते है कुछ ऐसी ही माताओं से जो बिना पति के भी बच्चों को अकेले संभाल रही हैं। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
विज्ञापन

2 of 5
कंचन - फोटो : अमर उजाला
हिम्मत की पिटारी बांध आगे बढ़ चली :
कंचन का संघर्ष एक मां के तौर पर काबिले तारीफ है। पति से अलग होने के बाद अपने बेटे की जिम्मेदारी ही नहीं संभाली, बल्कि एक दोस्त बनकर उसकी जरूरतों और भावनाओं को समझा। शिवाला की रहने वाली कंचन एक संपन्न परिवार की बहू बनकर आईं थीं लेकिन वक्त को कुछ और ही मंजूर था। पारिवारिक मतभेद के चलते शादी के कुछ सालों बाद ही उन्हें मायके वापस आना पड़ा। उनके साथ बेटे को पालने की चिंता थी। कंचन ने हिम्मत नहीं हारी। कभी काम किया नहीं था बावजूद इसके  रामकृष्ट मिशन से जुड़कर उन्होंने काम शुरू किया। आज उनका बेटा कक्षा 10 में है जिसे मां और पिता दोनों का प्यार कंचन ने दिया।
 
विज्ञापन

3 of 5
शिवानी गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
अब भी जारी है जिंदगी से जंग :
पहले पत्नी और अब मां के तौर पर शिवानी गुप्ता की जिंदगी से जंग जारी है। उम्र से पहले ही इस मां के चेहरे पर झुर्रियां आ गईं हैं जो उनकी कहानी बयां करने को काफी है। पति ज्योति प्रकाश गुप्ता को जिंदगी और मौत की जद्दोजहद से न निकाल पाने की कसक तो जिंदगी भर के लिए है ही, तीन बच्चों की जिम्मेदारी और उनके सपने को पूरा करना अब जिद है। कभी पापा की जिंदगी को बचाने के लिए क्रिकेट छोड़ चुके बेटे शुभम को इस मां ने आज स्पोर्ट्स हॉस्टल भेज दिया है। बेटी सोनाक्षी पिता को किडनी देने को तैयार थी लेकिन पिता बेटी का ये कर्ज ले पाते, उससे पहले ही वो चल बसे। आज भी बच्चों को पालने के लिए ये मां प्लास्टिक और झोले बनाने का काम कर रही हैं। बड़ा बेटा शिवम मां के कामों में ही हाथ बंटाता है।  

4 of 5
डॉ. पद्मजा शर्मा - फोटो : अमर उजाला
बेटा नहीं तो क्या, अपना लीं पांच बेटियां :
दुर्गाचरण बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. पद्मजा शर्मा ने मां की एक अलग ही मिसाल पेश की है। 2011 में पहले पति को खोया और तीन साल बाद ठीक उसी दिन उन्होंने अपने बड़े बेटे को खो दिया। उनके मां पिता को तो आज तक इस सच्चाई से दूर रखा गया है। अब अपने छोटे बेटे के सहारे उनकी जिंदगी कट रही है। बड़े बेटे के जाने के बाद उन्होंने पांच बेटियां अपना ली हैं। अपने ही स्कूल में वो उन्हें पढ़ाती हैं और उन्हीं में अपने बड़े बेटे का अक्स देखती हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
ताहिरा नूर - फोटो : अमर उजाला
मां की मेहनत से बेटी बढ़ चली आगे :
ताहिरा नूर की बेटी काशिफा पढ़ने में काफी अच्छी है, 10वीं की परीक्षा में 81% अंक पाकर मां की मेहनत को बोसा दिया। उसकी आंखों में दोगुनी चमक इसलिए थी क्योंकि उसके सिर पर पिता का साया नहीं है और मां लोगों से लड़कर अपनी बेटी को तालीम दिला रही है। जिंदगी की गाड़ी चलाने को मां सिलाई का काम करती हैं। मां पूरे लगन से बेटी को बैंक में ऑफिसर बनाने का सपना पाले आगे बढ़ रही है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें