धर्म नगरी काशी पूरी दुनिया में मोक्ष यानि मुक्ति के लिए जानी जाती है। इसकी एक बानगी शनिवार को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर एक बार फिर दिखी। यहां स्पेन की एक महिला मोक्ष की कामना से बेटे की अस्थियां लेकर पहुंची थी। स्पेन की यह महिला अपने बेटे की अंतिम इच्छा के लिए काशी पहुंची थी। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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- फोटो : amar ujala
स्पेन के बार्सिलोना निवासी मारिया टेरेसा ने अपने बेटे खोरदी को मोक्ष की कामना से उसकी अस्थियों को शनिवार को मणिकर्णिका घाट पर गंगा में प्रवाहित किया। दरअसल बार्सिलोना निवासी खोरदी की मौत 36 साल की उम्र में 15 मार्च 2018 को हो गई थी। उसका दाह संस्कार भी हिन्दू रीति रिवाज से स्पेन के टेररसा में किया गया था।
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varanasi
- फोटो : अमर उजाला
खोरदी की मां मारिया टेरेसा ने बताया कि खोरदी ने मौत से पहले अपने पिता गिजेर्मो से अपनी अस्थियों को देवों के देव महादेव की नगरी काशी में मां गंगा में प्रवाहित करने की अंतिम इच्छा जाहिर की थी। इसलिए खोरदी की अस्थियों को लेकर काशी पहुंची।
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काशी पहुंचने पर अपने इकलौते बेटे खोरदी के अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए उसने एक गाइड से संपर्क किया और इसे शनिवार को पूरे विधि विधान से अस्थियों का विसर्जन किया गया। मारिया बार्सिलोना से मुंबई के रास्ते शुक्रवार को काशी पहुंचीं।
अपने गाइड संजय गुप्ता के साथ मणिकर्णिका घाट पर हिंदू विधि विधान के साथ मारिया ने अपने बेटे खोरदी की अस्थियां को मोक्ष के लिए गंगा में प्रवाहित किया। मारिया ने कहा बेटे की इतनी आस्था है तो भगवान शंकर भी मेरे बेटे को जरूर मोक्ष प्रदान करेंगे।