मानसूनी सक्रियता के कारण वाराणसी सहित पूर्वांचल के कई जिलों में बारिश और बूंदाबांदी का माहौल बना हुआ है। वाराणसी में जून माह में औसत बारिश मानक का रिकॉर्ड टूट गया है। गंगा सहित अन्य नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटे में तापमान में तीन डिग्री की गिरावट दर्ज की गई।
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वाराणसी सहित पूर्वांचल के कई जिलों में बारिश
- फोटो : अमर उजाला
मानसूनी सक्रियता के कारण वाराणसी सहित पूर्वांचल के कई जिलों में बारिश और बूंदाबांदी का माहौल बना हुआ है। वाराणसी में 13 को मानसून के आने के बाद अब तक सात दिन में ही 200 मिलीमीटर बारिश होने से जून में औसत मानक का रिकॉर्ड टूट गया है। आने वाले दिनों में बारिश की जो संभावना जताई जा रही है, उससे पिछले दस साल का रिकॉर्ड भी टूट सकता है।
इधर, शनिवार सुबह से शुरू बूंदाबांदी रात तक तेज बारिश में तब्दील हो गई। इससे लोगों को उमस से राहत मिली। पिछले 24 घंटे में तापमान में तीन डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। आमतौर पर वाराणसी समेत पूर्वांचल में 20 जून तक मानसून आता है, लेकिन इस बार समय से पहले 13 जून को ही मानसून ने दस्तक दे दी।
अगले दिन से ही बारिश शुरू हुई, जो रुक रुक होती जा रही है। 13 से 16 जून तक 44 मिलीमीटर बारिश हुई थी जबकि 17 जून को 102 मिलीमीटर बारिश हुई। शुक्रवार और शनिवार को मिलाकर दो दिन में मौसम विभाग ने 54 मिलीमीटर बारिश दर्ज की। 13 से 19 जून तक कुल 200 मिलीमीटर बारिश हुई।
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मौसम वैज्ञानिक एसएन पांडेय के अनुसार जून महीने में औसत बारिश का मानक 114 मिली मीटर है, ऐसे में इन सात दिनों में ही इसका रिकॉर्ड टूट गया। बताया कि मानसून पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा है।
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अभी भी कम दबाव का क्षेत्र दक्षिणी पूर्वी उत्तर प्रदेश पर बना है। इस वजह से अगले दो-तीन दिन तक बारिश होने के आसार है। इसके बाद मौसम साफ रहेगा। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस रहा जो कि शनिवार को तीन डिग्री कम 27.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। न्यूनतम तापमान भी 24.2 की जगह शनिवार को 24.0 डिग्री सेल्सियस रहा।
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पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक लगातार हो रही बारिश का असर अब नदियों के जलस्तर पर दिखने लगा है। बीते 48 घंटों में गंगा के जलस्तर में करीब दो फीट से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संभावित बाढ़ से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने भी तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सुबह 8 बजे गंगा का जलस्तर 59.14 मीटर था जो रात नौ बजे 59.35 मीटर तक पहुंच गया।
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गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी ने नाविकों की माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। वहीं गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के कारण शैवाल की समस्या तो दूर हो गई है लेकिन कई घाटों पर जलकुंभी ने डेरा डाल दिया है। गंगा के जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है।
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बारिश के चलते शहर की सड़कें कीचड़ और गंदगी से पट गई हैं। गड्ढों में बरसाती पानी भर गया है। कुछ इलाकों की सड़कों पर दलदल जैसी स्थिति हो गई है। बारिश के चलते कूड़ा उठान भी प्रभावित हुआ। कई इलाकों में लोग जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। कीचड़ और गंदगी से राह चलना दुष्कर है। राहगीरों को हर पग पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। नाले-नालियां जाम हैं। गंदगी के कारण संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना है। जल निकासी के नगर निगम प्रशासन के प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं।
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दोपहिया, चार पहिया वाहन तो दूर घर से निकल कर पैदल चलना मुश्किल हो गया है। बेनियाबाग, बजरडीहा, जक्खा, रजानगर, मुर्गिया टोला, देव पोखरी, शंकुलधारा, विनायका आदि इलाकों में जलजमाव से नागरिकों व राहगीरों को बेहद परेशानी हो रही है। फारूकी नगर, आजाद नगर, सुदामापुर, सरायसुर्जन में जाम नाली का पानी गली में बह रहा है। लोग गंदे पानी से होकर आने-जाने को विवश हैं। जगह-जगह कूड़े के ढेर भी लगे रहे।
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दोपहिया, चार पहिया वाहन तो दूर घर से निकल कर पैदल चलना मुश्किल हो गया है। बेनियाबाग, बजरडीहा, जक्खा, रजानगर, मुर्गिया टोला, देव पोखरी, शंकुलधारा, विनायका आदि इलाकों में जलजमाव से नागरिकों व राहगीरों को बेहद परेशानी हो रही है। फारूकी नगर, आजाद नगर, सुदामापुर, सरायसुर्जन में जाम नाली का पानी गली में बह रहा है। लोग गंदे पानी से होकर आने-जाने को विवश हैं। जगह-जगह कूड़े के ढेर भी लगे रहे।