पूर्वांचल में जातिगत गणित हर चुनाव में अहम रहा है। प्रभावशाली जातियों में ब्राह्मण और राजपूत पहले से गिने जाते हैं तो भाजपा ने सवर्णों और भूमिहारों, सपा ने यादव, बसपा ने दलित, अपना दल ने कुर्मी, सुभासपा ने राजभर बिरादरी को अपने-अपने पक्ष में मजबूती से लामबंद कर रखा है। यादव, दलित और मुसलमानों के संभावित गुणा-भाग के मद्देनजर ही भाजपा ने अपनी चुनावी सांगठनिक संरचना बनाई है। पांच चरणों के चुनाव के बाद खाली हुए मंत्रियों और नेताओं को भी अलग-अलग जातियों और धार्मिक समूहों के बीच माहौल बनाने का काम सौंपा गया है।