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मोदी के खिलाफ कांग्रेस 'उधार' के उम्मीदवारों पर भर रही दम, कर पाएंगे पार्टी का बेड़ा पार!  

Fri, 03 May 2019 11:47 AM IST
Sayali Maurya प्रदीप मिश्र,अमर उजाला,वाराणसी
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यूपी पर फोकस करने के लिए कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की 41 लोकसभा सीटों की प्रभारी प्रियंका गांधी ने ‘गंगा यात्रा’ की थी। जिसके जरिए पूर्वांचल को चुनाव से पहले ही समझ लिया था लेकिन उम्मीदवार नहीं तलाश पाईं। छठे और सातवें चरण में मतदान वाली कई सीटों पर कांग्रेस दूसरे दलों के चेहरों के सहारे है। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
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नरेंद्र मोदी और अजय राय (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
यही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुकाबले के लिए वाराणसी में 'अपर हैंड' के बावजूद न तो खुद चुनाव लड़ीं और न ही विपक्ष का साझा प्रत्याशी उतारने में कामयाब हुईं। यहां से पुराने उम्मीदवार अजय राय को ही दोबारा चुनाव लड़ाने का फैसला अंतिम दौर में तब किया गया, जब उन्हें घर में नजरबंद करने के लिए 'पीला कार्ड' जारी हो चुका था।
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शिवकन्या
हालांकि कांग्रेस ने बसपा के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के साथ चुनाव से पूर्व गठबंधन किया था लेकिन अपने यहां जिताऊ प्रत्याशी न मिलने पर गाजीपुर और चंदौली सीट जन अधिकार पार्टी को दे दी। इस बार चंदौली से कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी और कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या 2014 में गाजीपुर से सपा की प्रत्याशी थीं। मनोज सिन्हा से उनका कड़ा मुकाबला हुआ था। शिवकन्या को 2 लाख 74 हजार 477 वोट मिले थे। सिन्हा उनसे 32 हजार 452 वोट ज्यादा पाकर जीते थे। 

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जन अधिकार पार्टी के प्रत्याशी अजीत प्रताप कुशवाहा
उधर, गाजीपुर से जन अधिकार पार्टी के प्रत्याशी अजीत प्रताप कुशवाहा को चुनाव लड़ने का अनुभव कम है। हालांकि कुशवाहा बिरादरी में अच्छी पैठ और मजबूत पकड़ की वजह से उनकी दावेदारी को मजबूत बताया जा रहा है। वहीं बलिया और मछलीशहर लोकसभा सीट पर नामांकन के आखिरी दिन ही पता चला कि यह सीटें कांग्रेस ने जन अधिकार पार्टी के लिए छोड़ दी हैं। बलिया से घोषित प्रत्याशी अमरजीत यादव का नामांकन रद हो गया है। अब यहां कांग्रेस गठबंधन का प्रत्याशी ही नहीं है। 
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रमाकांत यादव - फोटो : अमर उजाला
लापरवाही का आलम यह कि बलिया से आवेदक महिला कांग्रेस के प्रदेश पदाधिकारी पूनम पांडेय का बतौर डमी प्रत्याशी भी नामांकन नहीं कराया। मछलीशहर के प्रत्याशी डॉ. अमरनाथ पासवान बिल्कुल नए चेहरे हैं। इस सीट पर कांग्रेस से पूर्व विधायक मेवालाल दावेदारी कर रहे थे। वहीं भदोही से प्रत्याशी घोषित रमाकांत यादव और घोसी से बालकृष्ण चौहान दलबदलू हैं। आजमगढ़ को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के समर्थन के नाम पर छोड़ दिया गया है।
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पंकज मोहन सोनकर - फोटो : अमर उजाला
2012 में तीन विधायक थे, 2017 में सूपड़ा साफ :
वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ मंडल की 12 सीटों में से कांग्रेस के चंद प्रत्याशी ही नामी-गिरामी हैं। पहली सूची में मिर्जापुर से ललितेशपति त्रिपाठी, राबर्ट्सगंज से भगवती प्रसाद चौधरी और लालगंज से पंकज मोहन सोनकर का नाम आया था। तीनों पुराने कांग्रेसी हैं। ललितेश ने 2014 में 152666 वोट पाए थे। दूसरी ओर अजय राय 2014 में भी वाराणसी में मोदी के मुकाबले मैदान में थे। उन्हें 75614 वोट मिले थे। 2012 में ललितेश मिर्जापुर के मड़िहान, नदीम जावेद जौनपुर और अजय राय पिंडरा से जीते थे। 2017 में तीनों नेता फिर विधायक नहीं बन पाए।
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azamgarh - फोटो : amar ujala
पूर्वांचल में नहीं बची रह गई जमीन :
आजमगढ़ में 2009 में कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व सांसद संतोष सिंह ने 31159 वोट पाए थे। 2014 में अरविंद जायसवाल लड़े और उनको 17947 मत ही मिले थे। लालगंज में 2014 में बलिहारी बाबू ने 21832 वोट पाए थे। गाजीपुर सीट पर मो. मकसूद खां को 18908 वोट हासिल करने में सफल रहे। यही नहीं, 2014 में भदोही में कांग्रेस के अजीज इमाम को 22 हजार से अधिक तो चंदौली में तरुण पटेल को 28 हजार से अधिक वोट मिले थे। 2009 में चंदौली में कांग्रेस के शैलेंद्र सिंह ने जरूर 97377 वोट हासिल किए थे।
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