जौनपुर के नेवढ़िया थाना क्षेत्र के कादीहद गांव में कुषाणकालीन टीले के अवशेष मिले हैं। बसुही नदी के किनारे खेतों की खुदाई में पुरानी मानव बस्ती के प्रमाण मिलने से पुरातत्वविद उत्साहित हैं। वह इसे संरक्षित करने में जुट गए हैं।
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Kushan Empire settlement
- फोटो : अमर उजाला
अब तक खेतों की जुताई और खुदाई के दौरान वहां मिट्टी के बर्तन, ईंटें, पत्थर की मूर्तियां, शिवलिंग और नक्काशीदार कलाकृतियां मिल चुकी हैं। कादीहद में खेतों की जुताई या खुदाई के बाद पिछले कई वर्षों से मृद भांड और हौदियां निकलती रही हैं।
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अब इस गांव के दक्षिणी हिस्से में शिवलिंग, प्रस्तर खंडों पर दुर्लभ कलाकृतियों के अवशेष मिल रहे हैं। बस्ती से करीब पांच सौ मीटर दूर एक टीला है। इस टीले के आसपास खुदाई में लाल, काले मृद भांडों के अलावा सुराही, मुहरें, घड़े भी कई बार मिल चुके हैं।
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सेवानिवृत्त शिक्षक मकोधर सिंह बताते हैं कि यहां मिलने वाले मुह बंद मिट्टी के बड़े पात्र खोलने पर उसमें से राख निकलती है। गांव के सेवानिवृत्त एडीओ वशिष्ठ सिंह का कहना है कि तीन वर्ष पहले जेसीबी से खुदाई के दौरान एक घड़ा (हंडा) मिला था।
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कई बार रजत सिक्के भी मिल चुके हैं। युवक शशिकांत सिंह बताते हैं कि नदी के किनारे करीब एक किमी तक इस तरह के अवशेष मिल रहे हैं। इन लोगों की मानें तो महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के इतिहास विभाग और बीएचयू के इतिहासविदों को इसकी सूचना दी जा चुकी है।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने कहा कि विभाग ने गांव का सर्वे कराया है। वहां दो हजार वर्ष पहले की बस्ती के प्रमाण मिले हैं। जिन खेतों में मूर्तियां और घड़े मिल रहे हैं, वह किसानों की जमीनें हैं। ग्राम प्रधान से आग्रह किया गया है कि वह इन ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं का संरक्षण कराएं।