टाउनहॉल के अल्फ्रेड प्रेक्षागृह में राग और रंग के उत्सव ‘काशिका’ का शुभारंभ हुआ। वक्ताओं ने कहा कि मानस की चौपाई संगीत को जीवन का रसायन बताती है। काशी तुलसी, कबीर और रैदास की त्रिवेणी है। कार्यक्रम में महंत, महापौर अशोक तिवारी और नगर आयुक्त समेत अन्य लोग मौजूद रहे। उत्सव में संगीत और संस्कृति की झलक दिखी।
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राम की शक्तिपूजा का मनोहारी मंचन।
- फोटो : उज्जवल गुप्ता (अमर उजाला)
हिंदी दिवस की पूर्वसंध्या पर टाउनहॉल स्थित ऐतिहासिक अल्फ्रेड प्रेक्षागृह में राग और रंग के उत्सव काशिका का शुभारंभ हुआ।
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कार्यक्रम का शुभारंभ करते अतिथिगण।
- फोटो : अमर उजाला
हॉल में मौजूद जेन जी से संवाद करते हुए एमएलएसी धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि संगीत जीवन का रसायन है।
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कार्यक्रम को संबोधित करते सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल।
- फोटो : अमर उजाला
इस बात को रामचरितमानस की चौपाई के साथ सिद्ध किया जा चुका है। काशी तुलसी, कबीर और रैदास का त्रिवेणी संगम भी है।
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कार्यक्रम में आए लाेग।
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने यह कहकर लोगों को आश्चर्य में डाला कि साहित्यकार विनोद शुक्ला ने इस सभागार को एक जमाने में जीवित किया था। आज उसी का सफर जारी है।
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राम की शक्तिपूजा का भावपूर्ण मंचन करते कलाकार।
- फोटो : अमर उजाला
नागरी प्रचारिणी सभा, जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद और नगर निगम की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ नागरीप्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल, संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, एमएलसी धर्मेंद्र सिंह, काशी की संगीत परंपरा के पंडित कामेश्वर नाथ मिश्र, महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने शास्त्रीय वातावरण में किया। व्योमेश ने कहा कि इस स्थान का इतिहास 135 वर्ष पुराना है।
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गायन की प्रस्तुति देते पंडित साजन मिश्रा व स्वरांश मिश्रा।
- फोटो : अमर उजाला
प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि यहां की विलुप्त होती विरासत को इससे नया आयाम मिलेगा। अशोक कुमार तिवारी ने काशीनाथ सिंह से होते हुए भूला दी गई भाषा शैली पर बात की।
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राम के जयकारों से गूंजा हाॅल।
- फोटो : अमर उजाला
कहा कि यहां के मंदिरों से लेकर बिस्मिल्लाह खां की शहनाई और गंगा आरती से इतर बनारस की धरोहर संगीत और नाट्य की परंपराओं ने हर किसी को अपने वश में किया है।
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कलाकारों के मंचन ने मोहा।
- फोटो : अमर उजाला
आगे कहा कि काशी मनोरंजन का नहीं, अध्यात्म का शहर है। गिरिजाबाई जी, पंडित रविशंकर, बिरजू महाराज जी आदि की विरासत के बारे में नई पीढ़ी को बताया कि संगीत केवल सुना नहीं साधा जाता है, महसूस किया जाता है।
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नृत्य नाटिका का मंचन करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
रंग-सत्र ‘राम की शक्तिपूजा’ का नाट्य-रूपांतरण संध्या के पहले चरण में महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कालजयी काव्य-कृति राम की शक्तिपूजा पर एकाग्र नृत्य-नाटिका का मंचन किया गया। रूपवाणी की इस नृत्य नाटिका का यह 140वां मंचन था।
नाटक में संगीत का उचित संयोजन था। श्रीराम के अंतर्द्वंद्व, शक्ति की साधना और रावण पर विजय के विश्वास को कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं, सधे हुए नृत्य-पदचापों और प्रकाश-छाया के अद्भुत संतुलन से सजीव कर दिया।
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प्रस्तुति ने मोहा।
- फोटो : अमर उजाला
कथक, भरतनाट्यम समेत विभिन्न नृत्यकलाओं के मनोहारी संयोजन से तैयार जादुई प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपरा की सुंदर झलक पेश की। प्रस्तुति में भाव, लय और ताल का शानदार समन्वय देखने को मिला। खासकर नई पीढ़ी के दर्शकों ने इसे खूब सराहा और कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।