शारदीय नवरात्र में दुर्गा प्रतिमा स्थापना और पूजा पंडालों के बनावट के लिए मशहूर काशी में इस बार 15 फीट ऊंची देवी प्रतिमा बनाई जा रही है। मां दुर्गा के अलावा लक्ष्मी, गणेश, कार्तिकेय, मां सरस्वती, शेर समेत महिषासुर अलग ही रंग में नजर आएंगे। वहीं मौजूदा समय में किसानों की स्थिति को देखते हुए पूजा पंडाल को ग्रामीण परिवेश की थीम पर बनाया जा रहा है। जिसमें गांव में खेती करते हुए किसानों को दिखाया जाएगा। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
जैतपुरा स्थित मां बागेश्वरी देवी दुर्गोत्सव समिति के द्वारा इस वर्ष मां दुर्गा की 15 फीट ऊंची मूर्ति गेहूं, चावल, दाल और चाय पत्ती से बनाई जा रही है। मां दुर्गा के अलावा लक्ष्मी, गणेश, कार्तिकेय, सरस्वती, शेर और महिषासुर भी इको फ्रेंडली रूप में नजर आएंगे। पूजा समिति राजन जायसवाल ने सोमवार को बताया कि मां दुर्गा सहित अन्य मूर्तियों को बच्चों के द्वारा तैयार किया जा रहा है। वहीं 50 फीट ऊंची और करीब 70 फीट चौड़े पूजा पंडाल को पश्चिम बंगाल से आए विशेष कारीगरों के द्वारा बनाया जा रहा है।
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- फोटो : amar ujala
पंडाल के बाहर गांव के थीम पर सरपंच, कुआं और खेती करते हुए किसान नजर आएंगे। जो कि आकर्षण का मुख्य केंद्र होंगे। पंडाल के अंदर मां दुर्गा महिषासुर मर्दिनी के रूप में नजर आयेंगी। शारदी नवरात्र की सप्तमी को प्राण प्रतिष्ठा के बाद पूजा पंडाल भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा। दशमी को हवन पूजन के बाद मां दुर्गा को ईश्वरगंगी तालाब में विसर्जित कर दिया जाएगा।
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- फोटो : amar ujala
मां बागेश्वरी देवी दुर्गोंत्सव समिति के अध्यक्ष शैलेश द्विवेदी ने बताया कि पूजा समिति से जुड़े बच्चे ढाई माह से मां दुर्गा सहित अन्य मूर्तियों को चावल, गेहूं, दाल और चाय पत्ती से तैयार करने में जुटे हुए हैं। बच्चे अपने हाथ से आभूषण भी तैयार कर रहे हैं, जिसे चाय पत्ती और अरहर व उड़द की दाल से सजाया गया है।
मूर्ति तैयार करने में 150 किलो चावल, 150 किलो गेहूं, 50 किलो अरहर दाल, 50 किलो मसूर दाल, 50 किलो उड़द की दाल और करीब 10 किलो चाय पत्ती का उपयोग किया गया है। मूर्ति बनाने वालों में पार्थ जायसवाल, अर्थ जायसवाल, लक्ष्य, सना समेत करीब एक दर्जन बच्चे शामिल हैं।