आईआईटी बीएचयू की छात्राओं ने छात्रावास में रात 10 बजे तक लौटने की पाबंदी का विरोध शुरू कर दिया है। इसके लिए परिसर में बुधवार से हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। अभियान को छात्रों का भी समर्थन है। दावा है कि डायरेक्टर ऑफिस में सौंपी गई पिटीशन पर अब तक 1453 छात्र-छात्राओं ने हस्ताक्षर किए हैं। छात्राओं की मांगों पर कार्रवाई के लिए प्रबंधन को दो दिन का समय दिया गया है। कहा गया है कि अगर मांगें नहीं पूरी हुई तो आंदोलन को बाध्य होंगे। आगे की स्लाइड्स में देखें....
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आईआईटी बीएचयू का शैक्षणिक सत्र जुलाई में शुरू हुआ है। आईआईटी बीएचयू में छात्राओं के लिए रात 10 बजे तक हॉस्टल में आने का नियम है। छात्राओं ने इसे कर्फ्यू टाइम बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है। हस्ताक्षर अभियान के बाद छात्राओं की ओर से एक पांच सूत्रीय मांग पत्र भी निदेशक कार्यालय में भी दिया गया है।
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पत्र में छात्रावास में आने के लिए समय की पाबंदी हटाने के अलावा संस्थान की लाइब्रेरी को 24 घंटे खोले जाने की मांग भी रखी गई है। इसके अलावा यौन उत्पीड़न मामले में कमेटी के गठन, परिवार के पुरुष सदस्यों को गर्ल्स हॉस्टल के कॉमन प्लेस तक आने की अनुमति, गर्ल्स हॉस्टल के आसपास की बैरीकेडिंग पर आईडी कार्ड की सघन चेकिंग, सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाने, इमरजेंसी में उन्हें कार्रवाई का अधिकार देने आदि की भी मांग की गई है।
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मांगें सामने आने के बाद इस मसले पर कोई भी उच्चाधिकारी बोलने के लिए तैयार नहीं है। दरअसल, वे पूरे मामले को समझना चाहते हैं। उनको लगता है कि यदि कोई भी गलतबयानी हो गई तो बीएचयू के छात्र इसे हवा दे सकते हैं।
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प्रेस एंड पब्लिकेशन कमेटी के चेयरमैन प्रो. आरएस सिंह ने कहा कि छात्राओं की ओर से डायरेक्टर को दिए गए मांग पत्र के बारे में जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो इस पर गुरुवार को बातचीत कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।