वाराणसी के रीवा घाट पर गुरुवार की रात नृत्य की लयबद्ध थिरकन से यादगार बन गई। 101 नृत्यांगनाओं ने मृदंगम, तबले के साथ पारंपरिक बंदिशों पर जुगलबंदी की। मौका था ‘घाट संध्या’ के सौ दिन पूरे होने के जश्न का। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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‘घाट संध्या’ के सौ दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित की गई इस कार्यक्रम में घुंघरू संग नोकझोंक भी हुई और गंगा, शिव के नर्तन के भाव लयबद्ध हुए। सबसे पहले 50 कथक कलाकारों ने ध्यान श्लोक से नृत्य की शुरुआत की।
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भरतनाट्यम की प्रस्तुति के लिए एक साथ 51 नृत्यांगनाएं मंच पर आईं। हर-हर महादेव के जयघोष गूंजने लगे। तिस्र अलारिपु, कल्याणी जाति स्वरम के बाद केदार गौड़ में तिल्लाना की जोरदार नृत्य प्रस्तुति की गई। गायन एवं नट्टुवांगम प्रो. प्रेमचंद्र होम्बल, माला होम्बल ने किया।
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मृदंगम पर ए. विश्वनाथ पंडित, वायलिन पर पूर्णचंद्र पाइकराय, सोल्लुकट्टु पर संगत की नंदलाल गुप्ता ने। इसके बाद शंकर ग्रुप की ओर से कथक नृत्य प्रस्तुत किया गया। रुद्रशंकर, तनिष्क द्विवेदी, अर्पिता मिश्रा, अनुष्का वैद्य ने शिव वंदना के बाद पारंपरिक बंदिशों पर नृत्य किया। संगतकारों में बोल पढ़ंत किया माता प्रसाद ने।
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वाराणसी के रीवा घाट पर गुरुवार की रात नृत्य की लयबद्ध थिरकन से यादगार बन गई। 101 नृत्यांगनाओं ने मृदंगम, तबले के साथ पारंपरिक बंदिशों पर जुगलबंदी की। मौका था ‘घाट संध्या’ के सौ दिन पूरे होने के जश्न का।
इस मौके पर मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण , जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, सीडीओ सुनील वर्मा, एसडीएम राजातालाब ईशा दुहन समेत तमाम अफसर उपस्थित थे। वीडीए के उपाध्यक्ष पुलकित खरे ने घाट संध्या की रूपरेखा पर रोशनी डाली।