जौनपुर जिले के ऊदपुर गांव स्थित जूनियर हाईस्कूल में गुरुवार को 11:30 बजे मध्याह्न भोजन बनाते समय आग लगने से दो गैस सिलिंडर फट गए। इससे एक कमरा ढह गया और तीन कमरों की दीवारें और छत फट गई। घटनास्थल से भागकर बच्चों और शिक्षकों ने अपनी जान बचाई। मामले में लापरवाही के आरोप में प्रधानाध्यापक संजय कुमार को निलंबित कर दिया गया। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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- फोटो : अमर उजाला
नियमानुसार रसोई विद्यालय भवन से अलग कक्ष में होनी चाहिए, लेकिन जूनियर हाईस्कूल ऊदपुर में जिस कमरे में कक्षा चलती है, उसी से सटे प्रधानाध्यापक कक्ष को ही किचन बना दिया गया था। गुरुवार को रसोइया नूरेमा, मंजू देवी और सुमन सिंह भोजन बना रही थीं। 11:30 बजे सिलिंडर के रेगुलेटर के पास आग लग गई।
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इस पर तीनों रसोइयां शोर मचाते हुए बाहर आ गईं। उस समय विद्यालय की तीनों कक्षाओं में 70 विद्यार्थी थे। शोर सुनते ही बच्चे और शिक्षक भाग खड़े हुए। आधे घंटे बाद एक और उसके 25 मिनट बाद दूसरा सिलिंडर भी फट गया। मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर बीएसए डॉ. राजेंद्र सिंह ने जांच बैठा दी है। एमडीएम सेल के जिला समन्वयक अरुण कुमार मौर्य की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई है। बीएसए ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर जांच कमेटी रिपोर्ट देग्री।
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जूनियर हाईस्कूल ऊदपुर में रसोई के पास ही सीजफायर सिलेंड रखा गया है लेकिन इस हादसे में सीजफायर भी काम नहीं आ सका। रसोइयां और सहायक अध्यापक दुर्गेश सरोडज, राणा प्रताप, रवींद्र कुमार, सतीश कुमार और अध्यापिका सालिनी सिंह आदि का कहना है कि सीजफायर सिलेंड के इस्तेमाल के लिए उन्हें कभी ट्रेनिंग नहीं दी गई। जिससे वे समय पर उसका इस्तेमाल नहीं कर सके।
यहां रखे गए दोनों सीजफायर सिलेंडर की वैधता भी समाप्त हो चुकी है। उसे फिर से भराने की जरूरत नहीं समझी गई। प्रधानाध्यापक संजय कुमार का कहना है कि गैस सिलेंडर की पाइप और रेगुलेटर बदलने के लिए कई बार ग्राम प्रधान से कहा गया लेकिन उन्होंने नजर अंदाज कर दिया। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी शशिकांत श्रीवास्तव ने बताया कि पूरे ब्लॉक में 157 विद्यालय हैं।