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धर्म नगरी काशी में गंगा दशहरा पर पसरा सन्नाटा, श्रद्धालुओं की जगह दिखे पुलिस और सीआरपीएफ के जवान

Mon, 01 Jun 2020 10:59 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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दशाश्वमेध घाट पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : अमर उजाला।
कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन होने के कारण धार्मिक स्थल और भीड़ जुटने पर रोक लगी है। आज गंगा दशहरा के मौके पर श्रद्धालु भी मंदिर और गंगा स्नान करने नहीं जा पा रहे हैं। वाराणसी में भी काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाटों पर लोगों के जाने पर अभी रोक लगी है। जिस कारण घाटों पर सन्नाटा पसरा है।
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वाराणसी के दशाश्वमेध घाट भी सन्नाटा पसरा हुआ है। स्नान करने आए लोगों को पुलिस ने वापस भेज रही है। वहीं सीआरपीएफ के जवान भी तैनात किए गए हैं। हालांकि सरकार ने 8 जून से धार्मिक स्थलों को खोलने की अनुमति दे दी है।
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मंदिरों के खुलने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं
वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की ओर से जारी गाइडलाइन में मंदिरों के खुलने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हो पाया है। अगले आदेश तक मंदिरों में बंदी का जो फैसला पहले हुआ था, अभी  वह लागू रहेगा। इस दौरान किसी तरह के कोई धार्मिक जुलूस भी नहीं निकाले जाएंगे।

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निर्जला एकादशी पर दो दशक से निकलने वाली कलश यात्रा भी नहीं निकली। एकादशी पर श्रद्धालुओं के काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। मंगलवार को निकलने वाली प्रतीकात्मक कलश यात्रा के लिए मंदिर प्रशासन ने जारी अनुमति को निरस्त कर दिया है। रविवार को काशी विशिष्ट विकास क्षेत्र के एसडीएम विनोद सिंह ने कलश यात्रा की अनुमति को निरस्त कर दिया।
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उन्होंने बताया कि कोविड-19 के संक्रमण को देखते उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तत्काल प्रभाव से कलश यात्रा को निरस्त किया गया है।  दो जून को पडऩे वाली निर्जला एकादशी पर काशी मोक्षदायिनी समिति ने मंदिर के सीईओ से कलश यात्रा निकालने की अनुमति मांगी थी। निर्जला एकादशी की परंपरा को देखते हुए मुख्य कार्यपालक ने 30 मई को अनुमति दी थी।
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इसमें 11 श्रद्धालुओं और चार डमरू वादकों को ही मंदिर में प्रवेश कराने का निर्देश दिया था। रविवार को अधिकारियों ने विचार विमर्श करने के बाद अनुमति को निरस्त कर दिया है। काशी मोक्षदायिनी समिति के संरक्षण निधिदेव अग्रवाल ने बताया कि यात्रा निरस्त होने का पत्र प्राप्त हो गया है। प्रशासन का जैसा आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा।
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काशी विश्वनाथ मंदिर
दो दशक से निकलती रही है यात्रा
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि निर्जला एकादशी के दिन होने वाले विशिष्ट आयोजन वार्षिक कलश यात्रा दो दशक से काशी में निकल रही है। प्रतिवर्ष इस दिन हजारों भक्तों के हुजूम के साथ गंगा तट से कलश यात्रा निकलती थी। शहर की कई बैंड पार्टियां, शहनाई व नगाड़ा वादकों की टोलियां इसमें शामिल होती हैं। श्रद्धालु विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करते थे।
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