दुनिया में अपनी खूबसूरती और आध्यात्मिकता के लिए विख्यात काशी के गंगा घाटों के आकर्षण में अमेरिका निवासी इस युवक ने यहां आकर संन्यास ग्रहण कर लिया। वह अपनी धुनी पर योगासन के साथ सर्दी के मौसम में गुनगुनी धूप का कुछ यूं लुत्फ उठाते नजर आए। आगे की स्लाइड्स देखें...
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foreign saint
- फोटो : धीरेंद्र जायसवाल
अमेरिकी संन्यासी यहीं घाटों पर धुनी रमाते हैं और भारतीय संस्कृति और परंपराओं के अध्ययन में जुटे हुए हैं। भारतीय संत परंपरा सात समंदर पार के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने लगी है। वेद-वेदांत की जानकारी के लिए तमाम विदेशी काशी में संस्कृत का अध्ययन कर रहे हैं तो कुछ ने देसी गुरुओं से दीक्षा लेकर गेरुआ वस्त्र धारण कर लिया है।
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- फोटो : धीरेंद्र जायसवाल
गले में रुद्राक्ष, कंठी, हाथ में त्रिशूल और दंड-कमंडल लेकर काशी के घाटों से लेकर रेती तक विदेशी संत ध्यान-साधना कर रहे हैं।
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- फोटो : धीरेंद्र जायसवाल
अमेरिकी चकाचौंध में जीवन बिताने वाले 40 वर्षीय युवक को भारतीय संत परंपरा ने इस कदर प्रभावित किया कि उन्होंने दंड -कमंडल धारण कर लिया।
ऊं नम: शिवाय महामंत्र का जाप करने के साथ ही वह काशी की आध्यात्मिक चेतना को अपने जीवन में उतारने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में घूमने के बाद पता चला कि ऐसी नगरी कहीं नहीं है।