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Flood in Varanasi: वाराणसी के 46 स्कूलों में घुसा बाढ़ का पानी, ऑनलाइन पढ़ेंगे 11 हजार छात्र; देखें तस्वीरें

Mon, 04 Aug 2025 09:41 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में गंगा और वरुणा का पानी बढ़ जाने से आबादी क्षेत्र में परेशानियां बढ़ गई हैं। इस कारण हजारों की आबादी के साथ स्कूलें भी प्रभावित हुई हैं। जिले के करीब 46 स्कूलों में बाढ़ का पानी घुस गया है।
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बाढ के बीच बेटी को कंधे पर ले जाता पिता। - फोटो : अमर उजाला
Flood in UP: जिले के 46 माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालयों में बाढ़ का पानी घुस गया है। इससे इससे 11 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं की पढ़ाई ठप हो गई है। अब ऑनलाइन कक्षाएं चलाने की तैयारी है।

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एनडीआरएफ की टीम। - फोटो : अमर उजाला
जिला विद्यालय निरीक्षक भोलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित 46 विद्यालयों में से 21 ग्रामीण और 25 शहरी क्षेत्रों से हैं। ढेलवरियां, सलारपुर और हुकुलगंज के प्राथमिक विद्यालयों में वरुणा नदी के बाढ़ का पानी घुस गया है। 10 विद्यालय ऐसे हैं जिनके क्लास रूम तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। विद्यालयों की कक्षाएं ऑनलाइन चलाई जाएंगी। 
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फसलें हुईं जलमग्न। - फोटो : अमर उजाला
गंगा का जल स्तर बढ़ने के बाद नगवां नाले से पानी प्रवेश करने के बाद रामेश्वर मठ, भागवत महाविद्यालय से लेकर संगम पुरी कॉलोनी में पानी पहुंचने से लोग परेशान हैं। नगवां नाले से बाढ़ का पानी संकट मोचन मंदिर के पीछे तक पहुंच गया है। इससे लोगों का आना-जाना बंद हो गया है। वहीं, नक्खी घाट क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित ज्यादा इहैं। पीड़ितों का कहना है कि नावें बढ़ाई जाएं। अब भी 150 लोग फंसे हैं। 

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हर घंटे बढ़ रहा गंगा का जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला
नालों के जरिये गंगा की ओर जाने वाला सीवर अब उल्टा आ रहा है। इसके चलते गोदौलिया में घोड़ा नाला, रोपवे समेत कई निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिए गए हैं। वहीं, अपना घर आश्रम में भी पानी चला गया है।
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पाइप पर चढ़कर रास्ता तय करता युवक। - फोटो : अमर उजाला
जलकल के सचिव राम औतार ने बताया कि गंगा में लगातार बढ़ाव जारी है। कई नाले बैक फ्लो कर रहे हैं। जब जलस्तर नीचे होगा तभी व्यवस्था सामान्य होगी।
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अस्सी घाट पर गंगा का पानी। - फोटो : अमर उजाला
नक्खी घाट क्षेत्र में अब भी फंसे हैं 150 लोग 
नक्खी घाट क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित ज्यादा इहैं। पीड़ितों का कहना है कि नावें बढ़ाई जाएं। अब भी 150 लोग फंसे हैं। नगवां सोनकर बस्ती, हरिजन बस्ती में मिलाकर 70 परिवारों को गोपी राधा विद्यालय में बने राहत शिविर में भेजा गया है।
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दशाश्वमेध घाट पर शीतला मंदिर और जल पुलिस की चाैकी डूबी। - फोटो : अमर उजाला
नगवां गंगोत्री विहार कॉलोनी और नगवां नाले के किनारे रहने वाले 12 परिवारों को निकालकर प्राथमिक विद्यालय में भेजा गया है। इसमें करीब 43 सदस्य हैं। एनडीआरएफ की टीम ने रामेश्वर मठ के पीछे एक होटल संचालक और उनके परिवार को रेस्क्यू करके बाहर निकाला। 

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बाढ़ के कारण किनारेवासियों में बढ़ी दहशत। - फोटो : अमर उजाला
कॉशन पर 10 की गति से मालवीय ब्रिज पर चल रहीं ट्रेनें
खतरे के निशान को पार कर चुकी गंगा के जलस्तर को देखते हुए उत्तर रेलवे के मालवीय ब्रिज पर ट्रेनों को कॉशन पर चलाया जा रहा है। 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें संचालित हो रही हैं। आरपीएफ, जीआरपी की पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। एसएस व टीआई व अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। 

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वरुणा का पानी आबादी क्षेत्र में पहुंच गया। - फोटो : अमर उजाला
रेल अधिकारियों के अनुसार मालवीय ब्रिज (राजघाट पुल) पर गंगा को वाटर लेवल से नहीं बल्कि शीट से बढ़ोतरी मापी जाती है। मालवीय ब्रिज पर 234 शीट चेतावनी बिंदु है, वर्तमान में यह शीट बिंदु पार कर चुकी हैं। अब 237 शीट तक गंगा का पानी आ गया है, जिसके चलते ट्रेनों को कॉशन पर संचालित किया जा रहा है। 

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बाढ़ के पानी में स्नान करते शिवभक्त। - फोटो : अमर उजाला
परिचालन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार 240 शीट तक गंगा का पानी पहुंचने के बाद पुल पर एक बार में सिर्फ एक ही ट्रेनें संचालित होगी। वर्तमान अप व डाउन दो ट्रेनों को एक साथ संचालित किया जाता है। 240 शीट तक गंगा का पानी पहुंचते ही एक बार में सिर्फ एक ही ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। ट्रेनों व बाढ़ की मॉनिटरिंग के लिए आरपीएफ, जीआरपी की पेट्रोलिंग हर घंटे की जा रही है। इसके साथ ही एस एस व टीआई व अन्य स्टॉफ के लोगों की ड्यूटी लगाई गई है। 

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वाराणसी में बाढ़ के बीच का दृश्य। - फोटो : अमर उजाला
तत्काल राहत किट मुहैया कराई जाए
मंडलायुक्त एस राजलिंगम ने शनिवार को नाव से रविदास पार्क से होकर अस्सी घाट होते हुए ललिता घाट नेपाली मंदिर तक बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण किया। मंडलायुक्त ने एसडीएम को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें की कोई भी व्यक्ति बाढ़ के पानी में न फंसने पाए। बाढ़ से प्रभावित परिवार को बाढ़ राहत किट वितरित किया जाए। 

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Flood In Varanasi - फोटो : अमर उजाला
शिविर में तैनात करें महिला-पुरुष सिपाही
डीएम सत्येंद्र कुमार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र राहत शिविर सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज हुकुलगंज, चित्रकूट कॉन्वेंट इंटरमीडिएट कालेज और प्राथमिक विद्यालय सरैया का निरीक्षण कर किया। उन्होंने राहत शिविर में पुरुष व महिला सिपाहियों की तैनाती के निर्देश दिए। हुकुलगंज के निरीक्षण के दौरान नायब तहसीलदार ने आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के बारे में डीएम को बताया। 

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काशी में गांवों घुसा पानी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
20 राहत शिविरों में 2877 लोगों ने ली शरण
जिले के 20 बाढ़ राहत शिविरों में 605 परिवारों के 2877 लोगों ने शरण लिया है। 577 परिवार ऐसे हैं जो अन्य जगहों पर डेरा डाले हैं। सरैयां, सराय मोहाना, पुराने पुल, सलारपुर, शैलपुत्री, कोनिया, नक्खी घाट, सामने घाट, ढेलवरिया, सुजाबाद, डोमरी, अस्सी, दशाश्वमेध, लोहता, चिरईगांव समेत कई क्षेत्रों में तेजी से पलायन हो रहा है। प्रशासन की तरफ से रोस्टर के हिसाब से लंच पैकेट, फल, दूध पैकेट आदि लोगों को दिए जा रहे हैं। 

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घर का सामान शिफ्ट करतीं महिलाएं। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विधायक ने बाढ़ पीड़ितों में बांटी राहत सामग्री
शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने रविवार को कोनिया व राजघाट क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में गश्त कर पीड़ितों का हाल जाना। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटते हुए उनकी समस्याएं सुनीं। विधायक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ितों को दूध, चाय, फल की कोई कमी न हो। राहत शिविर में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए जेनरेटर और साफ-सफाई के निर्देश दिए। 

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वाराणसी में भरा पानी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
16 पशु चिकित्सकों के सहारे 46 बाढ़ चौकियां
पशुपालन विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 46 चौकियां बनाई गई हैं। इसके जरिये क्षेत्र के पशुओं के इलाज और टीकाकरण हो रहा है। वहीं, जिले में चिकित्सक की कमी से चौकियों पर दिक्कत हो रही है। एक चिकित्सक को दो से तीन चौकियों पर सेवा देनी पड़ रही है। जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरएस राजपूत ने बताया कि जिले में 16 चिकित्सक हैं। 

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बाढ़ के पानी मे डूबी किसानों की खेती। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
2000 कारखानों में घुसा पानी, 1500 लूम बंद
बाढ़ के कारण काशी के पारंपरिक कुटीर एवं हस्तशिल्प उद्योगों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। जिले के सरैयां, पुराना पुल, सलारपुर, शैलपुत्री, कोनिया, नक्खी घाट, ढेलवरिया, सुजाबाद, डोमरी, लोहता, चिरईगांव समेत कई क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने के कारण लोग सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर चुके हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बुनकर, कारीगर, रंगाई-छपाई, ठेले खोमचे और सिलाई से जुड़े छोटे कारोबारी काम करते हैं। गंगा और वरुणा के बाढ़ के पानी से जहां उनके तैयार माल डूब गए हैं, वहीं मशीनों में भी जंग लगना शुरू हो गया है। 
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काशी में गांवों में घुसा पानी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शाहंशाहपुर और टिकरी में सब्जियों की फसल डूबी
गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से जनपद के दक्षिणी छोर के गांवों में बाढ़ का पानी घुसना शुरू हो गया है। राजातालाब क्षेत्र का अंतिम गांव शाहंशाहपुर इसकी चपेट में आ गया है। यहां गंगा का पानी गांव के सिवान (खेतों के बाहरी किनारे) तक पहुंच चुका है। किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। उधर, टिकरी में भी स्थिति विकट है। गंगा का पानी टिकरी में बने बांध को पार कर ऊपर चढ़ गया है और मलहिया बस्ती तक पहुंच गया है। किसानों की फसल यहां भी पूरी तरह से डूब गई है।
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