बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के पास मंगलवार को आग लगने से हड़कंप मच गया। मेन बिल्डिंग के ठीक बगल में स्थित यूपीएस स्टोर रूम में आग लगने और तेज धमाकों के साथ बैटरियों के फटने से वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में दहशत में आ गए। घबराए परिजन दर्जन भर मरीजों को लेकर बाहर भागने लगे। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
तकरीबन आधा घंटे तक ट्रॉमा सेंटर परिसर में अफरातफरी का माहौल रहा। सूचना पाकर मौके पर पहुंची दमकल की तीन गाड़ियों और ट्रॉमा सेंटर में लगे अग्निशमन यंत्र की मदद से आग पर 30 मिनट में काबू पा लिया गया। आग पर जल्द ही काबू न पाया गया होता तो स्थिति भयावह हो सकती थी।
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ट्रॉमा सेंटर की ओपीडी के ठीक बगल में स्थित यूपीएस स्टोर रूम में आग लगने की खबर लोगों को मंगलवार शाम 5:10 बजे तब हुई जब वहां रखी बैटरियों के जलने से धमाका होने लगा। यह स्टोर रूम मेन बिल्डिंग के ठीक बगल में है।
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आग की लपटें तेजी से बढ़ती जा रही थीं, इसलिए किसी को कुछ समझ नहीं आया और लोग इमरजेंसी से निकलकर बाहर की ओर से भागने लगे। मौके पर विश्वविद्यालय अधिकारी, लंका पुलिस के साथ अग्निशमन विभाग के अधिकारी दमकल के साथ पहुंच गए। चार दमकल में तीन का पानी तो पूरा खत्म हो गया तब जाकर इसमें सफलता मिली।
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बीएचयू प्रशासन इसके लिए शार्ट सर्किट को मुख्य वजह बता रहा है लेकिन सेंटर परिसर में इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। यह भी आरोप लगा कि सूचना देने के 15 मिनट बाद तक पुलिस कंट्रोल रूम में फोन नहीं उठा।
यूपीएस स्टोर रूम में लगी आग को बुझाने के लिए शीशे को तोड़ना पड़ा। तब जाकर आग बुझाने में लगे कर्मचारियों को इसमें कामयाबी मिली। यहां 200 केवी के दो यूपीएस और 186 बैटरी रखी है। यूपीएस स्टोर रूम में दो माह पहले ही यूपीएस सिस्टम को बदला गया था। अब सवाल यह है कि तब क्यों नहीं इस तरह की खामियों की जांच की गई। शार्ट सर्किट की इस घटना के बाद इस तरह की चर्चा सेंटर परिसर में होती रही।