इसका कारण, यहां न्यूरोलॉजी, चर्म रोग विभाग, सर्जिकल आन्कोलॉजी, टीबी-चेस्ट, हृदय रोग, मेडिसिन आदि की ओपीडी में सिर्फ वरिष्ठ चिकित्सक मरीज देख रहे थे। जूनियर और सीनियर रेजिडेंट की कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। सुबह 10 बजे आए मरीजों में से कोई दो तो कोई तीन बजे चिकित्सक से परामर्श ले सका। उधर, वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजन भी रेजिडेंट डॉक्टरों के आने का इंतजार करते रहे। बीएचयू अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में एक सप्ताह में दूसरी बार हड़ताल से मरीजों को ज्यादा परेशानी हुई।