वाराणसी का दीनदयाल हस्तकला संकुल अपनी कई आकर्षक खूबियों के लिए चर्चित है। इसे ट्रेड फैसिलिटी सेंटर के नाम से भी जाना जाता है। पीएम मोदी ने हाल ही में इसका उद्धाटन किया था। इस संकूल की कई खूबियों में से एक है यहां लगा कार्पेट का डिस्प्ले। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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- फोटो : अमर उजाला
भदोही और बनारस में तैयार कालीन देश-दुनिया में अपनी पहचान बना चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कालीन मजबूती देने के उद्देश्य से सरकार विशेष प्रयास कर रही है। इसी के तहत दीनदयाल हस्तकला संकुल में कालीन के आकर्षक नमूने प्रदर्शित किए गए हैं, जो यहां आने वाले आयातकों और पर्यटकों का ध्यान बरबस अपनी तरफ खींच लेते हैं।
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बड़ालालपुर स्थित हस्तकला संकुल में भदोही की कालीन का डिस्प्ले बहुत आकर्षक तरीके से किया गया है। यहां मैनुअल और डिजिटल दो माध्यमों से कालीन प्रदर्शित की गई है। इसके अलावा कालीन बनाने की कला का भी प्रदर्शन किया जाता है।
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भदोही को कालीन का हब माना जाता है। हालांकि बुनाई और निर्यात का बड़ा केंद्र बनारस भी बन चुका है। भदोही, वाराणसी, मिर्जापुर में कालीन और दरी बनाने की परंपरा मुगलकाल से चली आ रही है। प्राकृतिक रंगों से हाथ से बनी कालीन की भारत की अपेक्षा दूसरे देशों में मांग ज्यादा है।
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दुनिया में सबसे अधिक हस्तनिर्मित कालीन भदोही से भेजी जाती है। यहां इस कारोबार में करीब 10 लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। लगभग आठ हजार करोड़ वाले इस पारंपरिक हस्तशिल्प को भारत की बौद्धिक संपदा अधिकार का दर्जा मिल चुका है।
नाटेड कार्पेट मूल रूप से भदोही की कालीन के रूप में प्रसिद्ध रही है लेकिन समय के साथ टफ्टेड, नेपली और सैगी कार्पेट का चलन भी तेजी से बढ़ा है। अब जूट, सिल्क, सिंथेटिक यार्न और काटन का प्रयोग भी कालीन बनाने तेजी से किया जा रहा है।