कण-कण शंकर की नगरी अपने आप में अनोखी है। कदम-कदम पर गलियों में विराजते शिव और उनके गण जहां भक्तों को आशीष देते हैं वहीं शक्तिस्वरूपा मां जगदंबा अन्न-धन का भंडार भरती हैं। बाबा विश्वनाथ के आंगन में विराजमान मां अन्नपूर्णा अपने भक्तों की हर इच्छा को पूरी करती हैं और यही कारण है कि धनतेरस से लेकर अन्नकूट तक श्रद्धालुओं का रेला माता के दरबार में उमड़ता है। मंदिर के महंत शंकर पुरी ने बताया कि मां अन्नपूर्णा का यह मंदिर देश का इकलौता मंदिर है जो श्री यंत्र के आकार में निर्मित है।
श्री यंत्र के ऊपर विराजमान माता अपने भक्तों और श्रद्धालुओं पर कृपा बरसाती रहती हैं। मंदिर के कोण मिलाने पर स्वत: स्वरूप में श्रीयंत्र का निर्माण हो जाता है। यही कारण है कि माता का यह स्थान स्वत: सिद्ध है। देश में कई स्थानों पर मां अन्नपूर्णा का मंदिर है लेकिन काशी में विराजमान मां अन्नपूर्णा का अलग ही महत्व है।